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बैठक से पूर्व मुगलिया बुनकर समाज के प्रमुख, स्वागत करते हुए। कार्यकर्ता बैठक व हटसन एग्रो के मालिक चंद्रमुगन के साथ
कल हम चेन्नई में बैठक कर रहे थे। प्रांत प्रचारक रवि जी, रोजगार प्रमुख दिली राजा जी, स्वदेशी के आदिशेषन जी, व महेश जी भी बैठे थे।
“कोरोना से जिनके रोजगार चले गए, उनको वापस दिलाने में कितने सफल हुए?” मैंने पूछा
दिली राजा संकोच में थे।बार बार पूछने पर बोले “सतीश जी! केवल 15 लोगों को ही रोजगार दिला पाया हूं,पिछले 4 महीने में।”
मैंने कहा “तुम्हें संकोच लग रहा है कि यह कम है,पर मुझे बताओ कि जब आपने पहले व्यक्ति को रोजगार दिलाया था तो कितनी संतुष्टि मिली थी?”
वह बोले “बहुत अधिक।”
तब मैंने कहा “किसी को भोजन कराने से हमें संतोष मिलता है,नकद मदद कर देने से और अधिक मिलता है किंतु किसी एक को भी रोजगार दिला देने से सर्वाधिक संतोष मिलता है, ठीक है न? इसलिए यह सर्वोत्तम काम है।”
सभी मुस्कुराए और सहमत हुए। महेश जी ने तभी एक वाक्य बोला “don’t give the fish, teach the man how to fish.”
*फिर आज हटसन एग्रो के मालिक चंद्रमुगन जी से मिलना हुआ।उन्होंने 1993 में अपनी आइसक्रीम बनाने की छोटी सी कंपनी को दूध इकट्ठा करने वाली अमूल जैसी बड़ी कंपनी बनाने की सोची। उतार, चढ़ाव की उन्होंने लंबी कहानी बताई। किंतु आज हटसन एग्रो 10 हजार गांवों के चार लाख किसानों की आय बढ़ाने में सफल हो रहा है।उसका 5000 करोड़ का टर्नओवर हो गया है। अमूल के बाद शायद भारत की सबसे बड़ी डेयरी क्षेत्र की यह कंपनी बन गई है। वैसे तमिलनाडु भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक व संपन्न प्रांत बना है।जय हो~सतीश कुमार