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दिल्ली संघ कार्यालय में संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, सहसरकार्यवाह सोनी जी,डाः कृष्ण गोपाल जी व अन्य

मेरी 5:30 बजे कश्मीरी लाल जी से फोन पर बातचीत हुई। “कितना सफल रहा आज का जनता कर्फ्यू व ताली थाली बजाने का कार्यक्रम?”मैंने पूछा
कश्मीरी लाल जी कहा “बहुत शानदार,बेहद सफल!” फिर मैं सोचने लगा “यह सोच क्या है, सब ने देखा टेलीविजन पर छोटे बच्चों से लेकर राष्ट्रपति तक सामान्य व्यक्ति से लेकर फिल्मी सितारों तक, सब तरफ उत्साह,सब तरफ जोश।”

जब दुनिया भर की खबरें देखी तो अमेरिका और चीन का नेतृत्व एक दूसरे को गाली गलौज पर उतरा है। स्पेन,इटली,फ्रांस का नेतृत्व रो रहा है।
आखिर भारत में और यूरोप-अमेरिका-चीन में इतना फर्क कैसे है? यह करोना विश्व युद्ध तो सारी दुनिया लड़ रही है।

जब किसी संस्कृति और उसके नेतृत्व की सोच कठिनाई को अवसर में बदलने की और गम को उत्सव में बदलने की होती है,तभी यह संभव होता है कि 135 करोड़ का देश और जिसके पास विकसित देशों की तरह कोई संसाधन या बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है लेकिन वह अपनी लड़ाई ना केवल सबसे अच्छे ढंग से लड़ रहा है बल्कि उत्साह,उमंग व जीत के विश्वास से लड़ रहा है।

चीन ने लाकडाउन कराया तानाशाही सरकार के आधार पर, सेना लगाकर, यूरोपीय देशों,अमेरिका व अन्य देशों के लाक डाउन तो फेल हो रहे हैं। भारत में इतनी जबरदस्त सफलता..! वह भी केवल जन-सहभागिता से!
यही है संस्कृतियों का फर्क,नेतृत्व का फर्क़! अभी लड़ाई महीना डेढ़ महीना और चलने की आशंका है, पर हम सब उत्साह से ही तैयारी रखें!

~सतीश कुमार