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पठानकोट में वोट डालने के बाद

लगभग 2 महीने पहले मैंने एनडीटीवी पर प्रणव राय की एक चर्चा सुनी।उसमें प्रणव राय बोल रहे थे “बीजेपी जो राष्ट्रवाद को मुद्दा बना रही है,आर्थिक और विकास के मुद्दे पीछे पड़ रहे हैं,इससे कुछ लाभ होगा क्या?”
और फिर जब कांग्रेस ने अपनी ₹72000 वार्षिक देने की न्याय योजना को घोषित किया तो मुझे भी लगा कम से कम जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं,वहां तो यह मुद्दा बहुत प्रभावी बनेगा और कांग्रेस को भारी विजय मिल सकती है।
और थोड़ा आश्चर्य भी हुआ कि जब बीजेपी ने उसके समानांतर कोई योजना घोषित नहीं की।
तब मुझे याद आया दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का एक पुराना भाषण।जिसमें वह कह रहे थे कि कम्यूनिस्ट रशिया ने दूसरे विश्व युद्ध को जीतने के लिए ‘राष्ट्रवाद’ का उपयोग किया। जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध में एटम बम से ध्वस्त होने के बाद देशभक्ति के आधार पर ही अपनी इकोनामी को खड़ा किया। वियतनाम भी इसी के आधार पर शक्तिशाली अमेरिका से युद्ध में परास्त नहीं हुआ।
तो भाजपा ने भी इसी राष्ट्रवाद, देशभक्ति व हिंदुत्व के मुद्दों को आधार बनाकर इस चुनाव में उतरने का फैसला किया। तभी पुलवामा,बालाकोट,प्रज्ञा ठाकुर को टिकट,अपने मुद्दों में हिंदुत्व के प्रतीकों का खुलकर प्रयोग किया।
और अब दिख रहा है कि लोगों पर आर्थिक मुद्दों से कहीं अधिक देशभक्ति और राष्ट्रवाद ज्यादा निर्णयात्मक होता है… यह एक बार फिर सत्य होता दिख रहा है।(कह सकते हैं कि भाजपा ने इस बार 2004 के परिणामों से सबक ले लिया था।)
बाकी कल लोग जश्न मनाने की तैयारियां कर ही रहे हैं अपनी भी शुभकामनाएं।
….जय स्वदेशी,जय भारत।