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4 दिन पहले मुझे अपने अखिल भारतीय संयोजक माननीय सुंदरम जी का फोन आया कि हम अर्थ एवं रोजगार सम्मान कार्यक्रम करने वाले हैं, ऑनलाइन! आप भी जुड़ना।

मैंने पूछा “किसका सम्मान करने वाले हैं?”
वह कहने लगे “श्रीधर वैंबू का! वह तमिलनाडु के मदुरई के ही नजदीक के गांव के रहने वाले हैं!”

फिर उन्होंने जो उनके बारे में बताया तो सच पूछो मुझे विश्वास तो नहीं हुआ पर वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं तो मैंने सहमति दी।
उनका सम्मान करने के लिए टीवीएस के चेयरमैन श्री गोपाल श्रीनिवास व नाबार्ड के चेयरमैन श्री गोबिंद चिंताला आये थे, मा:भगवती जी वक्ता थे कार्यक्रम ऑनलाइन था, छोटा था, पर भव्य था।

श्रीधर वैंबू की कंपनी ZOHO CORP. भारत, अमेरिका, मैक्सिको व जापान में काम करती है। कुल वैल्यू है, 1.83 बिलियन डॉलर। वह भारत के 76वें सबसे अमीर आदमी है। 8000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया हुआ है। इतना ही नहीं उन्होंने मदुरई के आसपास के 20 गांव में अपने 400 इंजीनियर भेज रखे हैं।

वे वहां से ही अपना ऑफिस चलाते हैं, 5 दिन ऑफिस का काम करते हैं और 2 दिन ग्राम विकास का। कोरोना संकट शुरू होने पर जब प्रधानमंत्री जी ने पीएम केयर्स में धन देने की अपील की तो उन्होंने 25 करोड़ रुपए दे दिए, वाह!

सुखद आश्चर्यजनक बात यह है कि स्वयं श्रीधर वैंबू वही गांव में रहते हैं।और स्वयं स्कूल के गांव में सप्ताह में 1 दिन बच्चों को मैथमेटिक्स पढ़ाते हैं।

उनका स्वप्न है कि भारत की सारी इंडस्ट्री अपने इंजीनियरों को अपने गांव के निकट ही ऑफिस बना कर दे और वही से वे कार्य करेंगे तो बहुत अच्छा आउटपुट कंपनी को भी देंगे और अपने परिवार की व अपने गांव की अच्छी विकास व देखभाल कर पाएंगे।

श्रीधर वैंबू जी ने स्वदेशी जागरण मंच का बहुत-बहुत धन्यवाद किया। नाबार्ड के चेयरमैन और टीवीएस के प्रेसिडेंट भी स्वदेशी प्रयत्नों व स्वावलंबी भारत पर बोले। ऐसे सफल कार्यक्रम देशभर में आयोजित होने शुरू हो गए हैं। अब भारत जॉब सीकर नहीं जॉब प्रोवाइडर बन रहा है, वह भी तेजी से… जय हो!