कल भिवानी के तीन दिवसीय स्वदेशी मेले में मंच की प्रांतीय टीम, विधायक घनश्याम जी,HSEB चेयरमैन जगवीर जी व् वहां के एक उच्च संतजन के साथ रहना हुआ
*मैं गत मास जम्मू माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय से वापस आ रहा था!गाड़ी एक बहन जो कि टाइम्स ऑफ इंडिया की सेल्स एग्जीक्यूटिव थी( उसके साथ एक पत्रकार भी थे) चला रही थी।मैने पूछा “चाइनीज बहिष्कार का यहाँ कैसा असर हुआ?” उसने बताया “मेरी बेटी तीसरी क्लास में डीपीएस स्कूल में पढ़ती है,उसका 31 अक्टूबर को जन्मदिन था।जब वह स्कूल गई तो मैने उसे क्लास के सहयोगियों के लिए 36 चॉकलेट व उतने ही शार्पनर ले दिये।किंतु जब उसकी मैडम ने देखा कि चॉकलेट तो ठीक है पर शार्पनर चीन के बने थे,उसने बच्चों से ही पूछा कि ‘मेड इन चाइना’के आप गिफ्ट लेंगे? सभी बच्चों ने ज़ोर से कहा-“नहीं” !बच्ची वापस घर पर आते ही मेरे से लगभग लड़ते हुए बोली”मम्मी आपने ये क्या किया?हम तो देश भक्त लोग हैं(उसके नाना सेना में रहे थे) फिर हम चाइना की वस्तुओं का प्रयोग या गिफ्ट कैसे दे सकते हैं ?हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था”…मैंने सोचा कि जब हमारे तीसरी कक्षा के छोटे बच्चे चीन का सामान लेने को तैयार नहीं चाहे मुफ़्त में भी मिलता हो तो इसका मतलब है चाइनीज बहिष्कार का अभियान कितना सफल रहा…
*उसी की दूसरी बानगी देखिए जब 29 अक्टूबर की रैली हुई तो रैली के पश्चात ज्ञापन देने के लिए स्वदेशी जागरण मंच का प्रतिनिधिमंडल रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण,खेल मंत्री विजय गोयल के साथ मिला।लगभग 1 घंटे की वार्ता में दोनों वरिष्ठ मंत्री इसी बात में ही व्यस्त रहे कि कैसे वे और सरकार चाइनीज घाटे को कम करने में लगी है!कैसे विभिन्न वस्तुओं पर एंटी डंपिंग ड्यूटी,स्टैंडर्ड व अन्य तरीके अपना रही है।
*दूसरा विषय स्वदेशी मेलों का आयोजन।बहुत कम लोगों को मालूम है कि सरकारी,अर्ध सरकारी,बड़े व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से तो इस देश को केवल 6 प्रतिशत ही रोजगार मिलता है 94 प्रतिशत लोग तो अपनी पूंजी,क्षमता,समयव मेहनत के आधार पर ही इस देश में रोजगार पाते हैं।इसी लघु एवं कुटीर उद्योग व गतिविधियों में लगे हुए लोगों को एक मार्केटप्लेस देने के लिए व उनके बारे में संपूर्ण देश में विश्वास बढ़ाने के लिए इन मेलों का आयोजन किया जाता है…