किसान अपनी बात रखते हुए तथा मंच पर डॉ ओमप्रकाश अरोड़ा, प्रोफेसर ओ पी चौधरी के साथ
मैं आज करनाल के उचानी गांव में था। वहां पर जिन किसानों ने अपनी छोटी कृषि से भी अच्छी कमाई की है,ऐसे किसानों का अनुभव कथन था।
लाडवा के राजकुमार आर्य जी, शाहाबाद के हरभजन सिंह जी, जगत राम जी और सोनीपत के संजीव कुमार जी ने जब अपनी जमीन में, कैसे वह प्राकृतिक खेती से फसल की लागत कम करके अपनी आय बढ़ा रहे हैं,बताया।
और फिर अपने गुड़ को ₹70 से 120 प्रति किलो तक बेचने के उन्होंने अनुभव सुनाए।
अनेक किसानों ने अपनी कठिनाइयां भी रखी जिसका,उन्हीं किसानों ने ही समाधान भी बताया।
मैं स्वयं हैरान था कि देसी गेहूं कैसे प्रति क्विंटल ₹5000 तक भी बिक सकती है!
किंतु वहां वह प्रत्यक्ष गर्व से अपनी बात कह रहे थे।
तो वहां बात चली कि किसानों की ऋण माफी,सब्सिडी या सरकारी सुविधाओं से नहीं,बल्कि यदि किसान प्राकृतिक खेती से और वैज्ञानिक तरीके से खेती करता है,मार्केटिंग करता है, थोड़ी हिम्मत जुटाता है, तो वह अपनी आय को तिगुना करने के लिए किसी सरकार का मोहताज नहीं।
सभी बहुत उत्साहित होकर और संकल्प लेकर गए की देसी गाय के गोबर से बनी प्राकृतिक खेती पर ही हम ध्यान देंगे।