2 दिन पूर्व CII (conf. of Indian industries) की एक विस्तृत रिपोर्ट आई है। जिसके अनुसार इस बार का प्रयागराज में चल रहा कुंभ मेला 1.12 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था का चक्र घूमाएगा और इसके कारण से कोई 6 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
आज सवेरे स्वदेशी कार्यालय पर कश्मीरी लाल जी,भगवती जी व अन्य सब चर्चा कर रहे थे कि पहले भी जब सूखा इत्यादि पड़ता था तो राजे महाराजे तालाब बावड़ी आदि खुदवाते थे।यज्ञ का आयोजन करवाते थे। इससे लोगों को काम भी मिलता था, धर्म तो स्वाभविक रूप से होता ही था।
तभी मुझे स्मरण आया कि दक्षिण के अपने कार्यकर्ता लिंगा मूर्ति जी ने कुछ वर्ष पूर्व हैदराबाद के गणेश उत्सव पर एक शोध सर्वेक्षण किया था। जिसके अनुसार दस दिवसीय गणेश उत्सव ने ही साल भर का 50000 लोगों के लिए रोजगार उत्पन्न किया था।
यही रहा है हमारी समृद्धि का राज। धर्म भी अर्थ चक्र व रोजगार भी।
नीचे प्रयागराज का एक दृश्य इस प्रकार की भव्य व्यवस्थाएं पहले कभी भारत ने देखी नहीं।निश्चित रूप से योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस विषय में प्रशंसनीय कार्य किया है।
एक किस्सा भी मीडिया में चल रहा है कि पहले हर वर्ष मुलायम यादव के जन्मदिन पर गांव सैफई में दुनिया से नाच गाने वाले लोग बुला कर करोड़ों रुपया लगता था, अब वह कुंभ मेले पर लग गया है। जो रोजगार भी उत्पन्न कर रहा है।