सतवीर सिंह जी से कोरोना के सेवा प्रसंग सुनते हुए

आज सवेरे कार्यालय की शाखा का हिंदू साम्राज्य दिवस था। वहां विषय रखने के बाद सह जिला कार्यवाह सतवीर सिंह जी से चर्चा हो रही थी। मैंने पूछा, “कोरोना काल में आपने स्वयं कार्य क्या किया?”
वह बोले, “मैंने नहीं संगठन ने किया। फिर भी एक प्रसंग बताता हूं।महिपालपुर के पास की सोसाइटी में एक महिला का कोरोना से देहांत हो गया। विभाग प्रचारक ने रात को मुझे फोन करके बताया कि सवेरे संस्कार की व्यवस्था करनी है। वहां कोई है नहीं।
हम सवेरे 5 कार्यकर्ता गए, तीसरी मंजिल पर घर था। एक बुजुर्ग व उसका लड़का (लड़के की मां का कोरोना से देहांत हुआ था)।
कोई नजदीक आने को तैयार नहीं। इन्होंने तुरंत पॉलिथीन की शीट जो लेकर गए थे, पहनी, दस्ताने पहने और शव को कपड़े से अच्छे ढंग से लपेटा। सीधी सीढ़ियां थी, छोटी थी, लेकिन दो स्वयंसेवक उपर, दो नीचे और वे शव को उतार लाए। शमशान घाट के अचारजी ने भी थोड़ा इधर-उधर किया तो इन्होंने आग्रह पूर्वक स्वयं होकर सारा संस्कार कर दिया।
मैंने पूछा, “तुम्हें भय नहीं लगा?”
वे बोले, “थोड़ा तो लगा, पर संगठन की सूचना थी, विभाग प्रचारक स्वयं साथ है, तो सोचा जो होगा देखी जाएगी।”
मैंने पूछा तो उन्होंने बताया, “इन दिनों में कुल 12 संस्कार किए हैं। और अब मृतकों के परिवार में सांत्वना सहयोग के लिए जा रहे हैं।”
मैं सोच में था कि जब परिवार, पड़ोस के लोग भी संस्कार करने को तैयार नहीं, तो अपने यह स्वयंसेवक किसी देवदूत से कम नहीं।~सतीश कुमार