गत 15 अगस्त को दिल्ली स्वदेशी संकल्प दिवस मनाते हुए

परसों joinswadeshi.com की टीम के द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम करके हरियाणा के 3 उद्योजकों का सम्मान किया गया।
मैंने प्रोफेसर सोमनाथ जी से पूछा “इनकी विशेषता क्या है?

तो उन्होंने बताया “मुकेश जी पानीपत में कंबल बनाते हैं। पहले यह सारा कंबल चीन से आ रहा था। फिर पानीपत के युवा उद्यमियों ने साहस दिखाया। वे चीन और ताइवान जाकर विशेष प्रकार की मशीनें ले आए।” “स्वदेशी जागरण मंच ने 3 साल पहले ‘स्वदेशी स्वीकार-चाइनीज बहिष्कार’ का उद्घोष दिया ही था। पानीपत की इंडस्ट्री ने उसका पूरा पालन किया।”

सरकार ने भी चीन के माल पर एंटी डंपिंग ड्यूटी कुछ बढ़ाकर सहयोग किया। आज मुकेश जी इंडस्ट्री से ही कोई 600 लोगों को सीधे रोजगार मिल रहा है।
वे स्वयं नौकरी न करके नौकरी देने का ही जुनून पाले हुए हैं।

वैसे अब मोटे तौर पर पानीपत को चाइना मुक्त कर लिया गया है। मुकेश जी जैसे युवा उद्यमियों की बड़ी भूमिका है। इन्हें बहुत-बहुत शाबाशी।

फिर करनाल के प्रोफेसर ओमपाल सिंह चौधरी जी ने बताया “करनाल के अशोक राजपाल जी, चार भाई हैं। तीन यहां पर और आप स्वयं बड़ौदा में एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट व उनके कलपुर्जे बनाते हैं। विश्व स्तर के पुर्जे बनाना इनकी विशेषता है। जर्मनी, जापान, इटली जैसे टेक्नोलॉजी में एडवांस देशों में इनके माल की मांग है। अशोक जी ने सिद्ध किया है कि “हम किसी से कम नहीं!”अशोक जी बहुत सामान्य परिवार में जन्मे,पर अपनी हिम्मत, इच्छाशक्ति व धैर्य से आज ऊंचे मुकाम पर पहुंचे हैं।

यह परिवार 500 लोगों से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है।अप्रत्यक्ष रोजगार पाने वालों की भी अछी संख्या है।
देशभर में अर्थ एवं रोजगार सृजक कार्यक्रमों की श्रृंखला चल पड़ी है। भारत अब नौकरी मांगने नहीं, नौकरी देने वालों का देश बनता जा रहा है…यही है आत्मनिर्भर भारत बनने का रास्ता..जय हो!

~ सतीश कुमार