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समुद्र तट पर टहलते हुए कश्मीरी लाल जी के साथ

आज सवेरे मैं शाखा के बाद सैर करने निकला तो सोचा जग्गी वासुदेव का प्रवचन सुना जाए। यूट्यूब पर अनुपम खेर से जग्गी वासुदेव की वार्ता सुनी।
अनुपम खेर ने पूछा “बच्चों को सफलता की राह पर कैसे डाला जाए?”
उसको सुनते-सुनते मेरे को स्मरण आया कि कुछ समय पूर्व मैंने दीपक चोपड़ा की प्रसिद्ध पुस्तक Seven spiritual laws of success’ पढ़ी थी। और कई बार कश्मीरी लाल जी से ‘सफ़लता’ पर चर्चा भी हुई है।
इन सब चर्चाओं से एक बात तो स्पष्ट है कि पैसा,ऊंचा पद और शोहरत यह सफलता के मापदंड नहीं हैं।
अगर होते तो माइकल जैक्सन जो अमेरिका का गायक था, उसके पास पैसा था,शोहरत थी, किंतु नशे व दर्द निवारक दवाइयां ले ले कर 55 साल की उम्र में ही मर कैसे गया?
जापान की तीसरी बड़ी कंपनी फिजित्सु का सीईओ 53 वर्ष की उम्र में ही 22 वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर गया। भारत की फिल्म स्टार श्रीदेवी 56 साल की उम्र में डिप्रेशन और नशे की हालत में मर गई… क्यों…क्यों?
जबकि आप अपने अड़ोस पड़ोस में ऐसे परिवार को अवश्य जानते होंगे,जो बहुत अधिक समृद्ध या शोहरत वाले तो नहीं पर बड़े संतुष्ट,प्रसन्न व सुखी रहते हैं।
असल में लोगों को अगर सफलता की स्पष्ट परिभाषा पता चल जाए तो उसे प्राप्त करना कठिन नहीं है। दीपक चोपड़ा कहते हैं “सफलता की सही परिभाषा है अच्छा स्वास्थ्य, मधुर संबंध, सकारात्मकता, उत्साह,रचनात्मक स्वतंत्रता, दूसरों की सेवा सहयोग करने की इच्छा आदि…यह सब हो तो आदमी को स्थाई रूप से सफलता का एहसास होता रहता है। फिर पद छोटा भी रहा,पैसा कम भी रहा,तो दिक्कत नहीं। वैसे जिसके पास सकारात्मकता है, स्वास्थ्य है, मधुर संबंध है..तो उसको कभी पैसे,यश और पद की कमी भी रहती नहीं!