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गत दिनों विजयवाड़ा की बैठक में बोलते हुए कश्मीरीलाल जी व कल के समाचार पत्रों में छपी रिपोर्ट

कल मैंने वर्ल्ड (बैंक) पावर्टी क्लॉक की एक रिपोर्ट पढ़ी। जिसके अनुसार भारत में प्रति मिनट 44 लोग गरीबी रेखा से बाहर आ रहे हैं। और इसके कारण से अब भारत दुनिया में सर्वाधिक गरीबों वाला देश नहीं रहा।
1955-56 में भारत में 65% लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। तमाम तरह की दिक्कतों, विकृत विकास नीतियों के बावजूद 2018 में भारत में गरीबी रेखा से नीचे वालों की संख्या घटकर 16-17% तक रह गई है।
और यह केवल एक मापदन्ड पर ही नहीं बल्कि सभी 10 मानकों पर प्रगति हुई है। कल ही छपी रिपोर्ट भी नीचे लगी है।
भारत में यद्यपि असमानता व बेरोजगारी यह अभी भी बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। इस पर समाज व सरकार को तुरन्त और सर्वोच्च प्राथमिकता से काम करना होगा।
परंतु यह भी सत्य है कि आज भारत 2.8 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के साथ दुनिया की छुट्टी बड़ी अर्थव्यवस्था है।और इंग्लैंड (2.9 ट्रिलियन) से जल्दी ही पार कर पांचवा पांचवें स्थान पर आने वाला है।

इस समय पर देश में चर्चा हो रही है, 5 ट्रिलियन डॉलर की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की।
किंतु स्वदेशी स्वप्न व सोच है, 100% रोजगार और 0% गरीबी वाला भारत।
टीवी पर गीत आता ही है….
मेरा देश चल रहा है… और आगे बढ़ रहा है।
स्वदेशी अपनाओ, देश को समृद्धि व रोजगार युक्त बनाओ।….जय हो