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दक्षिण के प्रवास पर परसों मैं बेंगलुरु पहुंचा। वहां पर आईटी प्रोफेशनल्स का एक कार्यक्रम रखा था। बेंगलुरु भारत की आईटी राजधानी मानी जाती है। कोई 20लाख आईटी प्रोफेशनल वहां काम करते हैं। यानी वह भारत का कैलिफोर्निया है।
वहां मैंने आह्वान किया “भारत को नई टेक्नोलॉजी में दुनिया का अगुआ राष्ट्र बनाने के लिए सभी इंजीनियर, वैज्ञानिक मिलकर कोई बड़ा प्रयत्न कर सकते हैं क्या? ताकि हम Artificial intelligence, Robotics, Block chain, Big data जैसे विषयों में भी दुनिया में ऐसे ही अगुआ बन जाएं, जैसे आईटी के क्षेत्र में,अमेरिका के बाद हैं।”
मैंने यह भी पूछा “क्या हम भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बना सकते हैं?”
इसी तरह अगले दिन वहां से 160 किलोमीटर दूर तुमकुर जिले में स्वदेशी के दक्षिण कर्नाटक प्रांत के कार्यकर्ताओं की बैठक थी।
12 जिलों के 90 कार्यकर्ता आए थे।कर्नाटक प्रांत की एक विशेषता है कि यहां पर छोटे-छोटे स्वदेशी मेले बड़ी मात्रा में लगते हैं। स्वदेशी स्टोर भी बड़ी मात्रा में हैं।वहां अपने तीन प्रस्तावों की चर्चा हुई।’भारत को भारत कहो,इन्डिया नहीं’ पर वहां विषेश उत्साह दिखा।
प्रोफेसर कुमार स्वामी जब विषय लेते हैं,कन्नड भाषा में,तो मुझे भले ही कुछ समझ में ना आए, पर कार्यकर्ताओं के चेहरे देखकर मैं समझ गया कि उनको स्वदेशी का विषय गहराई से छू रहा है।अपने प्रचारक जगदीश जी तो उन सबके बीच में जोड़ने वाला सूत्र है ही।
कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद अनौपचारिक गपशप करते ही, तुरंत मैं आगे मदुरई के लिए निकल पड़ा।…जय स्वदेशी-जय भारत!