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भारतीय मजदूर संघ के संगठन मंत्री-हैदराबाद कार्यक्रम में,आसाम में लीना सैकिया जी, सिल्चर के कार्यक्रम में।

सवेरे 11:00 बजे लिंगामूर्ति जी का हैदराबाद से फोन आया “सतीश जी मैं क्या करूं? आज शाम को 7:00 बजे कार्यक्रम है और मुख्य वक्ता इंकार कर रहे हैं? तुरंत कश्मीरी लाल जी या अश्विनी जी को तैयार करो!”
दोपहर में भोजन करके कमरे में गया ही था कि आसाम के सिलचर के अपने अभियान प्रमुख सीए रवि जी का संदेश आया हुआ था “सतीश जी 3:30 पर अवश्य जुड़ जाना। यह मेरा पहला कार्यक्रम है, आप ध्यान रखिएगा।”
सवेरे कश्मीरी लाल जी पहुंचे प्रयागराज का 2 दिन का पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रवास करके। वहां पर 2 दिन में चार कार्यक्रम थे, अर्थ एवं रोजगार सृजन कार्यक्रम के।इसके अलावा स्वदेशी पदयात्रा वहां प्रारंभ हुई थी।

इधर दिनकर जी पंजाब से मुझे फोन कर रहे थे कि कल किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश जी को बुलाया है मुझे और क्या-क्या बातें ध्यान रखनी चाहिए?
मैं सोच में था की स्वदेशी के कार्यकर्ता उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम सब तरफ सक्रिय हैं।अपने इनीशिएटिव लेकर अपने-अपने क्षेत्र में कार्यक्रमों के चिंता कर रहे हैं। जबकि 6 महीने से प्रत्यक्ष कोई प्रवास तो नहीं संभव हो रहा। किंतु स्वदेशी के कार्यकर्ता विचार की प्रेरणा से चलते हैं। धेययवाद के कारण से चलते हैं। और तभी तो उन्हें चिंता इस बात की नहीं है कि कोई उनके यहां प्रवास करने आया या नहीं? अपने क्षेत्र में मुझे स्वदेशी,रोजगार स्वावलंबन,आत्मनिर्भर भारत इन सब विषयों के लिए मुझे काम करना है,अपने से करना है, जीवन का मिशन है यह मेरा! इस भावना से ही वे काम कर रहे हैं..
“न हो साथ कोई, अकेले बढ़ो तुम,
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी..”गीत उन्होंने गया ही है।