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 कल से तमिलनाडु में कश्मीरी लाल जी का प्रवास शुरू हुआ,मदुरै में बैठक। और दिल्ली मे एक आटो वाला कुलदीप भंडारी, जिसने सवारी का भूल गया बैग ढूंढ कर लौटाया

5 दिन पहले मैं हरदा (मध्यप्रदेश) जाने के लिए कार्यालय से निकला। मुझे थोड़ा जल्दी थी इसलिए मैंने औला कैब बुक की, किंतु 12 मिनट का समय उसने आने में लेना था। नीचे उतरते ही आगे ऑटो मिल गया तो मैंने उससे पूछा “नई दिल्ली स्टेशन चलोगे,क्या लोगे?” ऑटो वाला बोला “₹180!”
मैंने कहा “अरे भाई! 140 में तो टैक्सी ही जा रही है, तुम मीटर से चलो ना?”
तो वह बोला “मेरा मीटर खराब है।”

मैंने कहा “चलो ऐसा करें,तुम्हारे पास प्रति किलोमीटर का चार्ट तो है, तुम अपने फोन में जीपीएस लगाओ और किलोमीटर नाप लो।नहीं तो मैं अपने फोन में लगा लेता हूं।”
वह सोच में पड़ गया। मैंने कहा “चल जितना भी खर्चा आएगा, उससे ₹10 फालतू दूंगा।”

कुल मिलाकर वह चल पड़ा। रास्ते में बातें करते,मैंने उसका घर-बार व छोटी मोटी बातें भी पूछी।
अंत में ₹110 का उसका बिल बना। मैंने 120 ही दिए। वह अपनेपन से कहने लगा “साहब क्या करें, यह ओला,उबर वाले हमारा काम खींच जाते हैं।”

मैंने कहा “घबराने की जरूरत नहीं!  इस टेक्नोलॉजी का उपयोग करो। स्मार्टफोन फोन तो तुम्हारे पास है ही। किसी भी सवारी को कहो कि अपना जीपीएस लगा ले। क्योंकि उन्हें शक यह होता है कि यह ऑटो वाले घुमाकर बिल अधिक बना देते हैं, यदि तुम उन्हें ऐसा कहोगे तो वह विश्वास करने लगेंगे और तुम्हें अगर दिन में 10 सवारी मिलती हैं तो उसके बाद 12-13 मिलने लगेंगी।टैक्सी वालों को तो ओला उबर को 20% देना पड़ता है तुम्हें कुछ नहीं देना। इससे तुम्हें फायदा होगा।”

उसकी बात समझ में आ गई जाते हुए कहने लगा “साहब! आपने नयी बात बताई है, करके देखूंगा।”
जो भी हो मुझे संतोष हुआ कि मैंने उसको ठीक राह दिखाई।