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कल्बुर्गी मे स्वदेशी स्वाभिमान स्टोर का निरिक्षण करते हुए
परसों मैं कर्नाटक के कलबुर्गी में था और सवेरे आयुर्वेदिक कॉलेज में बोलने के लिए निकलना था तो प्रांत संयोजक पाटिल ने कहा, “आपको पहले एक स्वदेशी स्टोर का निरीक्षण करना है। अपने ही स्वदेशी कार्यकर्ता अनिल तम्बाके और 4 साथी हैं, इन्होंने बड़ा स्वदेशी स्टोर शुरू किया है।”
मेरे मन में था, होगा कोई छोटा मोटा, जिसे यह बड़ा कह रहे हैं।
किंतु जब मैं वहां पहुंचा तो वास्तव में वह एक अच्छा बड़ा रिटेल शोरूम था। मैंने घुसते ही पूछा, “अगर मैंने कोई आइटम विदेशी निकाल दी तो?”
अनिल बोले, “जो आप जुर्माना लगाएंगे, मंजूर!”
खैर मैंने भी बारीकी से एक एक चीज देखी, 100% स्वदेशी ।
फिर वह मुझे गन्ने का रस निकालने वाली मशीन दिखाने लगे।
मैंने पूछा, “बनी कहां है?” “गुजरात राजकोट में।” “अंदर के पार्ट्स चीनी तो नहीं?”
“नहीं! पूरी तरह से चेक कर के लिए है?” वे बोले
और कमाल की मशीन है। एक ही बार में 98% रस निचोड़ देती है। और ₹10 में एक गिलास, वहां बड़ा लोकप्रिय हो रहा है।
फिर उन्होंने मूंगफली व नारियल का तेल निकालने वाली मशीन दिखाई। “यह कहां की बनी है?” मैंने पूछा।
“यह तमिलनाडु के कोयंबटूर में बनी है। और ग्राहक को सामने ही निकाल कर देते हैं। इसलिए शुद्धता की गारंटी होती है।
पहले वे एक छोटा सा स्वदेशी स्टोर चलाते थे। अब पूरा बड़ा। मैंने पूछा “प्रतिदिन की सेल कितनी होती है?” वह संकोच में थे। पर मैंने कहा कि मुझे देश को बताना है। तो उन्होंने बताया “प्रतिदिन 65 से ₹70000 तक की सेल हो जाती है।” तो उनको शाबाशी देते हुए मेरे मुंह से निकला “स्वदेशी में है दम…बोलो वंदे मातरम!”
कर्नाटक में एसे कोई 150 स्टोर चलते हैं।
~सतीश कुमार