अपने कश्मीरी लाल जी! गत 34 वर्षों से संघ के प्रचारक व 11 वर्षों से अखिल भारतीय संगठक -स्वदेशी जागरण मंच! कठिन विषय को भी सहज हंसते हुए रखने की क्षमता! स्वस्थ शरीर, टीम वर्क करने में माहिर व विषम परिस्थिति को भी सहज, सरल हंसमुख ढंग से मोड़ने का एक अपना अनूठा तरीका!यही विशेषताएं हैं हमारे कश्मीरी लाल जी की!67 वर्ष की आयु में भी महीने में 20 दिन से अधिक का प्रवास! सदा चरैवेति..चरैवेति!हम हैरान होते हैं वे पढ़ते कब हैं?क्योंकि विद्वता,सहजता का संगम होता है उनका उदबोधन…
और केवल वही नहीं,स्वदेशी जागरण मंच में इस समय नौ प्रचारक व पांच पूर्णकालिक कार्यकरता है!किंतु मैं कह सकता हूं कि क्षेत्रीय व अखिल भारतीय स्तर पर भी कम से कम 6 ऐसे कार्यकर्ता हैं जो प्रचारक तो नहीं है पर प्रचारक से कम भी नहीं है!(नीचे-आज जब हम दोनों मासिक कार्य समीक्षा हेतू बैठे तो मैंने उनकी सहज अवस्था के चित्र ले लिए)
स्वदेशी पर विश्वास:-गत दिनों स्वदेशी कार्यालय पर एक सज्जन आए! उस समय पर बैठक के कारण काफी कार्यकर्ता वहां थे! उन्होंने विस्तार से पूछा “स्वदेशी जागरण मंच का कार्य ऐसे कैसे चलता है?खर्चा कहां से आता है? मंदिर से क्या स्वदेशी चलाते हैं?फिर बोले “क्या मैं भी कुछ योगदान कर सकता हूं?तो कार्यालय पर अपने रस्तोगी जी ने उनको बताया “हां!यह तो समाज के सहयोग से ही चलने वाला कार्य है!” तो उन्होंने कहा “ठीक है,मैं यहां पर पानी पीने के लिए एक मशीन देना चाहता हूं! ₹10000 ले लो” पर रस्तोगी जी ने कहा “नहीं,जब 9000रुपये की मशीन है तो उतना ही पर्याप्त है” वे सज्जन अपना नाम बिना बताये पैसा देकर चले गए। यह है स्वदेशी पर एक सामान्य जन का विश्वास
आज का विचार:-बिना प्रयत्न के सफलता ही वास्तविक सफलता है!यह आंतरिक एहसास है,जो सकारात्मक दृष्टिकोण से उत्पन्न होता है!…