Swami-Vivekananda - समाचार नामा

स्वामी विवेकानंद

आज मेरी विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री, अपने प्रचारक विजय नड्डा जी से बातचीत हुई! मैंने पूछा “आपने फेसबुक पर लिखा है,की सर्वहितकारी शिक्षा समिति (विद्या भारती पंजाब) के विद्यालय सरकार चाहे तो कोरेंटिन केंद्र बना ले, क्या यह सच है?”
उन्होंने कहा “इसमें क्या बात है सतीश जी?” यह विद्यालय समाज के लिए ही हैं!समाज पर संकट है,तो केवल विद्यालय की बिल्डिंग ही नहीं, हमारी बसें तेल सहित भी प्रशासन को समर्पित हैं।और भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो विद्या भारती देगी!”

उनकी यह बातें सुनकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
क्योंकि मुझे याद आया 1902 में जब प्लेग फैला था तो स्वामी विवेकानंद जी ने अपने सहयोगी, 20-22 सन्यासियों को कहा “इस समय हमारा एक ही धर्म है,रोगियों की सेवा करना” और जब कोई ब्राह्मण दान मांगने आए भी तो उन्होंने कहा “इस समय,पहला दान का भागी यह गरीब गुरबे प्लेग के रोगी हैं!”

फिर एक दिन ऐसा आया जब सन्यासियों के पास दवाई इत्यादि खत्म हो गई।तो एक सन्यासी ने कहा “अब हमें कहीं से पैसा भी नहीं मिल रहा, दवाई तो पैसों से ही आएगी। अब हमें काशी चले जाना चाहिए।”
तो स्वामी विवेकानंद जी ने कहा “अगर कोई हमें पैसा नहीं दे रहा तो मैं अपना बेलूर मठ बेचने को तैयार हूं। यह मठ मंदिर किस काम के? नर सेवा ही नारायण सेवा है।”
और सन्यासी तन मन से जुट गए और जो लोग पहले पैसा देने में संकोच कर रहे थे स्वामी जी के इस प्रस्ताव के बाद पैसा भी देने लग गए। यही हमारी परंपरा है और संघ के कार्यकर्ता, प्रचारक उसी परंपरा का ही इस समय पालन कर सारे देश में समाज सेवा में जुट गए हैं।सब तरफ से समाचार आने लग गए हैं…जय हो

~सतीश कुमार