आज पंजाब के फाजिल्का जिले के कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कश्मीरी लाल जी

कोरोना का संकट यद्यपि अभी भी बना हुआ है, फिर भी
हम भारतीयों ने अपना दम दिखाते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को संभालना शुरू कर दिया है।
हम सब जानते हैं कि पिछली तिमाही में भारत का जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) -23.9% तक गिर गया था। जीडीपी मापने के जो आठ कोर सेक्टर होते हैं उनमें कृषि को छोड़कर सब बुरी तरह से गिरावट में (नीचे) थे। किंतु ब्लूमबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अगस्त महीने में एक नहीं, पांच सेक्टरों में सुधार हो गया है, 2 में स्थिरता आ गयी है, व केवल 1 में गिरावट रह गई है।
आप देखिए की ई वे बिल जो अप्रैल में महज 3.90 लाख करोड़ रुपए के जारी हुए थे, अगस्त में 13.85 लाख करोड़ के हुए हैं। पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी पिछले साल के अगस्त महीने से ज्यादा हो गई है।बिजली की मांग भी 90% रिकवर हो गई है। टोल संग्रह में लगातार वृद्धि हो रही है। जीएसटी संग्रह में गिरावट के बाद सुधार हुआ है। ईवे बिल की संख्या में भी बढ़ोतरी जारी है।

यही नहीं हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 545 अरब डालर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यद्यपि अनेक क्षेत्रों में अभी निर्यात कम है किंतु दवा वा फार्मास्यूटिकल्स में 20% की वृद्धि दर्ज हुई है।
अगस्त महीनों में गाड़ियों फोर व्हीलर (कार,छोटा ट्रक) आदि की बिक्री में 14.1% की वृद्धि हुई है। रिटेल सेल में भी सुधार है कैपिटल गुड्स आउटपुट जो जुलाई में 10.4% गिरा था अब पॉजिटिव (सुधार पर) आ गया है।
यह भारत के लोगों की जिंदादिली ही कही जाएगी की कोरोना की इतनी बड़ी कठिनाई के बाद भी हम तेजी से अपना कारोबार, रोजगार और काम धंधे ठीक करने में जुट गए हैं।
यह वैसा ही है कि भूकंप के कारण से यदि मकान गिर गया तो परिवार के लोग मिलकर तेजी से उसे फिर से बनाने में जुट गए हों। हम भारत के लोग भी कोरोना के भूकंप से गिरी, अपनी अर्थव्यवस्था के मकान को दोबारा से खड़ा करने में तेजी से जुट गए हैं।
गीत याद आ रहा था…
“सुनो गौर से दुनिया वालो, बुरी नज़र न हम पे डालो
चाहे जितना जोर लगा लो, सब से आगे होंगे हिंदुस्तानी.”
~सतीश कुमार
* देशभर में स्वदेशी स्वावलंबन अभियान द्वारा आयोजित अर्थ एवं रोजगार सृजक सम्मान के कार्यक्रम चल रहे हैं।