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स्वदेशी सप्ताह के अंतर्गत नागपुर में स्वदेशी कार्यकर्ता

सत्यमेव जयते! अंततः सत्य की विजय तो होगी पर उसके लिए धर्म युद्ध भी लड़ना ही होगा।

…आरसीईपी यानी-Regional comprehensive economic partnership.
इन दिनों में भारत सरकार इस मुक्त मुक्त व्यापार समझौता करने की ओर बढ़ रही है, जिसमें कोरिया जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के अलावा चीन भी है। और हैं सिंगापुर, मलेशिया वाले 10 आसियान देश। किंतु भारत के उद्योग जगत व कृषक समाज ने इस समझौते का विरोध किया है। क्योंकि इसके कारण से सस्ते चीनी आयात और भी भारत के बाजार में बड़ जाएंगे।न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से दूध, दूध का पाउडर व अन्य डेयरी सामान सस्ते में आने से यहां के किसानों को बहुत दिक्कत होगी। यही बात स्टील- एलुमिनियम व अन्य मेटल उद्योग में भी है।

इसके कारण से यहां की ये फैक्ट्रियां बंद होंगी, बेरोजगारी और बढ़ेगी। यहां तक कि दवा उद्योग, पेपर उद्योग, टेक्सटाइल-कपड़ा उद्योग इन सब ने भी विरोध किया है।
इस संभावित मुक्त व्यापार समझौते से भारत में विदेशी आयात बढ़ेंगे,बेरोजगारी बढ़ेगी उद्योग धंधे बंद होंगे, किसान परेशान होंगे। स्वदेशी जागरण मंच ने भी इन सब का साथ देते हुए इस संभावित समझौते का पुरजोर विरोध किया है। हम सब का कर्तव्य बनता है की इस समझौते का हर स्तर पर विरोध करें और सरकार को इस बात के लिए तैयार करें कि वह इस प्रकार के किसी समझौते पर हस्ताक्षर ना करे।

सरकार में बैठे कुछ लोग और अफसर जो यह समझते हैं कि इससे भारत को फायदा होगा,वे देश को गुमराह ही कर रहे हैं,इसमें देश का कुछ भी भला होने वाला नहीं। तथ्य,अर्थशास्त्री, उद्योग जगत व किसान सभी यही कह रहे हैं।
हम स्वदेशी के कार्यकर्ता भी आश्वस्त हैं कि अंततः सत्यमेव जयते..सत्य की विजय होगी ही। पर हां! उसके लिए यह धर्म युद्ध तो हमें लड़ना ही चाहिए।