Image may contain: 3 people, beard
दोनो युवाओं के साथ
3 दिन पूर्व मैं कलबुर्गी से दिल्ली जा रहा था। सामने वाली सीट पर दो युवक थे। जब मैं कुछ फोन कर रहा था तो उससे अनुमान लगाकर वे मेरे से पूछने लगे, “आप कोई प्रोफेसर हैं क्या?”
मैंने कहा, “नहीं! किंतु मैं सामाजिक कार्यकर्ता हूं स्वदेशी का काम करता हूं।”
वे कहने लगे, “आप कुछ आर्थिक मामलों की बात कर रहे थे।”
तो मैंने कहा “हां!रोजगार, स्वदेशी का मूल विषय है।”
वह कहने लगे, “कुछ हमें भी बताओ?”
लेकिन मैंने कहा, “पहले तुम बताओ कि अभी क्या कर रहे हो?”
तो वह एक टैक्सटाइल कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर था। कहने लगा, “₹55000 तक मिलता है। किंतु आगे का कोई बड़ा भविष्य नहीं दिख रहा।”
मैंने कहा, “वहाँ 1-2 वर्ष का अनुभव और लेकर तुम अपना ही कोई काम करने का क्यों नहीं सोचते?”
तो वे कहने लगे “हमारे पास तो कोई बड़ा पैसा ही नहीं है।”
तो मैंने उन्हें कहा, “बड़ी कमाई करने के लिए बड़े पैसे की आवश्यकता नहीं है बल्कि बड़ी सोच, रिस्क लेने की क्षमता,धैर्य और परिश्रम की जरूरत होती है।”
फिर मैंने उन्हें स्टीव जॉब्स व कल्पना सरोज के बारे में बताया कि उनके पास पैसा या बड़ी डिग्रियां नहीं थी बल्कि ये 4 गुण थे, जिससे उन्होंने न केवल अपना बड़ा व्यवसाय खड़ा किया बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी दिया।
कुछ अन्य प्रश्न उन्होंने पूछे। किंतु मैंने उनसे वचन लिया कि वह अगली बार साल 2 साल बाद जब कभी मिले तो मुझे अपनी सक्सेस स्टोरी जरूर सुनाएंगे। वह कुछ भावुक हुए और हामी भर कर अपने गंतव्य को गए।