खादिम जूता उद्योग के संस्थापक सिद्दार्थ राय बर्मन
जगाधरी में पदमभूषण प्राप्त दर्शनलाल जैन जी को बधाई देते कश्मीरी लाल जी व मैं स्वयं।
कल हम यमुनानगर में एक विषय पर चर्चा कर रहे थे कि क्या स्वदेशी उद्योग भी करोड़ों,अरबों कमा सकता है?
तो मुझे कश्मीरी लाल जी ने खादिम के बारे में बताया।
बंगाल के सिद्धार्थ राय बर्मन। 1981 में इस नवयुवक ने छोटे-छोटे जूते बनाने वाले लोगों को एकत्र कर, एक कंपनी बनाई-‘खादिम’।फिर उसने थोक दुकानदारों को जूते बेचने का काम शुरू किया। बाद में उन्हें लगा कि क्यों ना अपनी ही रिटेल दुकानें खोल कर ये जूते बेचे जाएं? क्योंकी थोक दुकानदार इन्हें ज्यादा पैसा नहीं देते थे। तो इन छोटे-छोटे जूते बनाने वाले लोगों की कंपनी ‘खादिम’ ने रिटेल काउंटर भी खोलने शुरू कर दिए 1993 में।
धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। अनेक कठिनाईयों के बावजूद सिद्धार्थ राय टिके रहे।और आज यह एक बिलियन डॉलर याने 7000 करोड़ रुपए की कंपनी बन गई है।
सस्ते व अच्छी गुणवत्तापूर्ण वाले खादिम ब्रांड के भारत में 853 रिटेल स्टोर हैं। दुनिया के कोई 30 देशों में इनका निर्यात है।
यह बताता है कि अगर हमारे लोग स्वदेशी उद्यमिता पर विश्वास करें, धैर्य पूर्वक, नई तकनीक का उपयोग करें, मेहनत करते हुए आगे बढ़ें तो 35-36 वर्षों में ही कितना बड़ा काम खड़ा हो सकता है।
जय स्वदेशी,जय-जय स्वदेशी