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नागपुर की स्वदेशी टीम!

कल नागपुर की स्वदेशी टोली के साथ चर्चा हो रही थी। विषय निकला की चुनाव सर्वे कराने वाली एजेंसियों ठीक होती हैं या अपने कार्यकर्ताओं की जमीनी सूचना।
जैसे मैं गत 11 मई को अहमदाबाद में था वहां पर कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने मुझे बताया की गुजरात की सभी 26 सीटें आ रही हैं जबकि सर्वे एजेंसियों 21-22 ही बता रही थी।उसी दिन जब IIMअहमदाबाद के सीनियर प्रोफेसर से मिलना हुआ तो उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में 30- 32 से अधिक सीट नहीं आएंगी।
थोड़ा चिंतित हो, मैंने उत्तरप्रदेश के कार्यकर्ताओं से फोन पर जानकारी मांगी। उनका स्पष्ट कहना था “60से कम नहीं आएंगी।” यही बात बंगाल के बारे में भी है।जहां सभी एजेंसियां 8-10 से अधिक नहीं बोल रही थी जमीनी कार्यकर्ता कह रहे थे कि 18-20 जरूर आएंगी।
युवावस्था से ही प्रणव राय के बारे में मेरी आस्था रही है कि वह सटीक विश्लेषण करते हैं। उन्होंने कर्नाटक का विश्लेषण किया हुआ था की 15 सीट से अधिक नहीं आएगी। पर मैंने कर्नाटक के कार्यकर्ताओं से जब बात की तो उन्होंने कहा कि “नहीं!20-21 से कम नहीं आएंगी।”
यह बात फिर मैंने उसी दिन ना केवल कश्मीरी लाल जी को फोन पर बताई बल्कि अगले दिन की स्वदेशी चिट्ठी में भी लिखी। उसी में मैंने यह भी लिखा था “कार्यकर्ताओं की जानकारी के आधार पर नहीं लगता कि कांग्रेस को 60 सीटें भी आएंगी।”
जिस दिन एग्जिट पोल आए तब भी कश्मीरी लाल जी से बात हुई कि वैसे तो नीलसन कंपनी का सर्वे बहुत सटीक आता है,जिसने एबीपी न्यूज़ के लिए किया है। किंतु स्वदेशी के जमीनी कार्यकर्ताओं की सूचना के हिसाब से तो एक्सेस कंपनी याने इंडिया टुडे का सर्वे जिसमें NDA की 350 सीटों की संभावना बताई थी,ठीक लगता है। बाद में ध्यान में आया जो देश भर के कार्यकर्ता बता रहे थे,वही ठीक है।
इसका कारण है अपने कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से गांव,गली में ठोस काम करते हैं और उन्हें जो दिख रहा होता है, उसे बिना किसी हिचक के वे वरिष्ठों पर विश्वास के कारण स्पष्ट बता देते हैं।
कुछ सीखेंगी, ये सर्वे कंपनीयां?