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स्वामी जी व सुंदरम जी के साथ

कल मैं व हमारे अखिल भारतीय सह-संयोजक सुंदरम जी दिल्ली के रामकृष्ण मिशन के स्वामी शांतानंद जी महाराज से मिलने के लिए गए।
थोड़ी बातचीत के बाद मैंने उनसे पूछा “मिशन के कुल कितने विद्यालय और सेवा के केंद्र चलते हैं?”
तो उन्होंने बताया कि भारत के 225 केंद्रों से हम 200 से अधिक बड़े विद्यालय, हजारों सेवा प्रकल्प जिनमें छोटे औषधालय, बड़े हस्पताल, विकलांग सहायता केंद्र, यह सब चलाते हैं।अतिवृष्टि,सूखा या भूकम्प आदि प्रकृतिक आपदाओं के समय पर भी मिशन के सन्यासी व कार्यकर्ता सेवा के कार्य पूरी शक्ति के साथ करते हैं।
यह भी ध्यान में रहे कि आज जो असम और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में हिंदुत्व की लहर दिखाई देती है उसमें संघ परिवार के प्रयासों के अलावा एक बड़ा योगदान रामकृष्ण मिशन के स्कूलों व सेवा प्रकल्पों का भी है।अन्यथा तो हमारा पूर्वोत्तर ईसाई मिशनरियों ने हमारे से झटक ही लिया होता।
फिर मैंने पूछा “कुल कितने सन्यासी इस मिशन में हैं?” तो उन्होंने बताया कि कुल 1800 सन्यासी देश और दुनिया भर में स्वामी विवेकानंद का संदेश फैला रहे हैं।” वे आगे बोले कि “हम तो गरीबों, पीड़ितों, वंचितों की सेवा को भी अध्यात्म का मार्ग ही मानते हैं।”

एक विशेषता और भी है, इस मिशन के सन्यासियों की, कि वे ज्यादातर उच्च शिक्षित व संभ्रांत परिवारों के होते हैं।
हम दोनों ने स्वामी जी के चरण छुए,उन्हें स्वदेशी जागरण मंच की गतिविधियों के बारे में भी बताया। वे स्वदेशी के बारे में कुछ जानते भी थे और वरिष्ठ संघ के अधिकारियों से बहुत अच्छे परिचित भी हैं।
और हम मन में उस अद्वितीय महापुरुष स्वामी विवेकानंद जिन्होंने 1893 में ही अमेरिका में भारत और हिंदुत्व जागरण का शंखनाद कर दिया था जिसे आज हम प्रत्यक्ष देख रहे हैं, श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर स्वदेशी कार्यालय लौट आए।
जय स्वदेशी-जय भारत