“यह घर ही स्वदेशी कार्यालय है,और यहाँ हम दो स्वदेशी जागरण मंच के पूर्णकालिक रहते हैं!” राजकोट के रमेश दवे जी ने पत्नि की तरफ़ देखते हुए कहा…बहनजी ने भी हाँ में हाँ मिलाई! स्वदेशी समर्पण देखिए…समयसमर्पण तो है ही…जब छोटी बेटी(दो बेटियाँ ही हैं)का विवाह किया तो शगुन में आयी राशि स्वदेशी जा:मंच हेतू समर्पित कर दी…दोनों न केवल गुजरात में बल्कि देश भर में हर बैठक,कार्यक्रम में अवश्य पहुँचे मिलेंगे! प्रचारकों को तो निकटतम रिश्तेदार मानते हैं…सोच रहा था ऐसों के कारण ही तो स्वदेशी कार्य बढ रहा है…जय हो…
*मोरवी-गुजरात…धन्य हुआ आज यहाँ आकर! ऋषि दयानंद सरस्वती की जन्मभूमि टंकारा का दर्शन कर! किन्तु बड़ा सुखद आश्चर्य हुआ,यह सुनकर कि यहाँ के टाईल उद्योग ने चीन को न केवल भारत से खदेड़ दियाहै बल्कि 80 देशों में उच्च गुणवत्ता का माल भेज चीन से सिरामिक टाईल मार्केट का बड़ा हिस्सा छीन लिया है…मोरनी की और भी बडी success story है, पर आज इतना ही..ठीक ही कहा है…कुछ दिन तो गुज़ारो गुजरात में …जय गुजरात,जय भारत..