दक्षिण भारत के प्रवास पर जाते हुए ट्रेन में एक बच्चे के साथ
बिट्टू टिक्की वाला:- “मैं तो अयोध्या के पास एक गांव में छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था,किसी तरह गुजारा कर रहा था!तभी दोस्तों की सलाह पर दिल्ली जाकर कोई काम धंधा करने की सोची। कोई बिजनेस करने की बात कहां,मेरे पास कुछ भी पैसे नहीं थे।पर किसी तरह रानी बाग में टिक्की गोलगप्पे की एक रेडी लगा ली मैने। कुछ काम चल गया तो गांव से मैंने अपने भतीजे को बुला लिया!धीरे-धीरे एक खोखा ,फिर एक दुकान खरीद ली…बस राम जी की कृपा बनी रही और आज सबकुछ आपके सामने है” यह सब स यादव बता रहे थे जो 2 वर्ष पहले दिल्ली के स्वदेशी सम्मेलन में अपनी कहानी सुनाने आए थे!जानते हैं आप इनके बारे में? यह हैं BTW के मालिक-एस. के.यादव,जिनका आज उत्तर भारत में BTW नाम का बड़ा कैटरिंग क्षेत्र का ब्रांड है!कोई 1200 लोग इनके पास रोजगार प्राप्त कर रहे हैं! इसे ही कहते हैं एंटरप्रेन्योरशिप! यही है स्वदेशी उद्यमिता..
स्वदेशी प्रेमी शिव नरेश:- “मेरे पिताजी तो सिले सिलाए कपड़े बेचने का छोटा-मोटा व्यापार करते थे! जब हम थोड़े बड़े हो गए तो घर की आवश्यकताओं को देखते हुए उन्होंने अपने कपड़े सिल कर बेचने की सोची। दहेज में मां को मिली सिलाई मशीन पर ही पहला ट्रैक सूट हमने सिला!फिर धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा! मैं पूरी तरह से अपने इस उद्योग में रम गया दिनरात मेहनत करने लगा! ।और आज यह शिव नरेश स्पोर्ट्स ड्रेस ग्रुप आपके सामने हैं”! “आज भारत में ही नहीं तो बाहर दुनिया के 15 देशों में मेरा माल जाता है! भगवान की कृपा से कोई 1500 लोग मेरे साथ काम में रोजगार पा रहे हैं !कुल मिलाकर 1000 करोड़ का बिजनेस है”
मैं सोच रहा था कि यदि भारत के नए युवा इसी तरीके से उद्यमिता के क्षेत्र में हाथ आजमाएं तो भारत की बेरोजगारी को, उसकी समस्या को,दूर होते देर नहीं लगेगी सम्पन्नता तो आएगी ही….जय स्वदेशी जय भारत