आज चेन्नई में अपने अ:भा:सह संयोजक सुंदरम जी मुझे व कश्मीरी लाल जी को एक मंत्री से मिलाने ले गए!
हमें आश्चर्य हुआ! मैने पूछा “इस सरकार के मंत्री से हमें क्यों मिलाने ले जा रहे हैं?”
उन्होंने कहा “वह एक पुराना स्वदेशी कार्यकरता है!उसकी कहानी सुनी तो मुझे लगा कि स्वदेशी चिठ्ठी के पाठकों को भी बताऊं..!
पंड्या राजन शिवाकाशी में एक माचिस फैक्ट्री में काम करने वाले का लड़का केवल 3 मास का था जब पिताजी की मृत्यु हो गई!मां ने किसी तरीके से पाला!
इंजीनियरिंग की परीक्षा के बाद MBA भी किया!
उसके पश्चात क्या काम करना तो उसने एक छोटी मानव संसाधन की कंपनी बना ली!
जो हम कह रहे हैं कि Don’t be Job seeker, Be job Provider उसी प्रक्रिया अनुसार उसने लोगों को नौकरियां दिलवाने,उद्योग शुरू करने उसके गाइडेंस व प्रेरणा देने की ही कंपनी चलाई!और वह भी केवल मात्र ₹60000 में!
किंतु अगले 10-12 वर्षों में ही उसने कोई 3.50लाख लोगों को देश से लेकर विदेश तक नौकरियां लगवाई, उद्योग-धंधे शुरू करवाए!उनकी आजीविका शुरू करवाई!
उसी तरीके से महिला उद्यमिता व गरीब बच्चों के लिए भी अच्छे ट्रस्ट शुरू किए!
इसी समय वह स्वदेशी का कार्यकर्ता बना 5 वर्ष प्रान्त टोली में अच्छा कार्य किया!बाद में एक दिन उसने सुंदरम जी से कहा “सुंदरम जी! मेरी राजनीति में जाने की इच्छा है!” सुंदरम जी ने उसे BJP का संकेत कर दिया!
किंतु तमिलनाडु की राजनीति देखते हुए वह पहले विरुद नगर से लोकसभा चुनाव DMDK से लड़ा,हार गया!बाद में AIADMK पार्टी से विधायक चुना गया और दूसरी बार विधायक चुनने के बाद अब मंत्री हो गया है! विभिन्न संगठनो ने उसे उद्यमिता व ईमानदार व्यक्तित्व का पुरुस्कार भी दिया है!
शायद इस कैबिनेट में वह एकमात्र मंत्री होगा जिसके बारे में लोग कहते हैं कि हां पंड्या राजन ईमानदार है!
जो भी हो जब हम मंत्रालय में गए तो उस ने सबके सामने कहा “मैं स्वदेशी का पुराना कार्यकर्ता हूं और इन्हीं लोगों के कारण से आज मैं विधायक व मंत्री बना हूं!”
तमिल भाषी मंत्रालय के सब लोग हमें आश्चर्य से देखने लगे!
कश्मीर से कन्याकुमारी एक ही स्वर..
जय स्वदेशी..जय जय स्वदेशी..!
कल मदुरई में स्वदेशी जागरण मंच की तरफ से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन था!जिसमें 10~13वीं शताब्दी के चोल राजाओं के अर्थशास्त्र पर लिखी पुस्तक चोलोनोमिक्स का विमोचन कार्यक्रम था!
इस बार का राष्ट्रीय सम्मेलन भी मदुरई होने वाला है! जोकि कन्याकुमारी से निकट है!कुछ दिन पहले मैं जम्मू में था जम्मू की स्वदेशी टोली से लेकर मदुरई की स्वदेशी टोली देख कर एक विश्वास उठ रहा है…
कश्मीर से कन्याकुमारी तक स्वदेशी की लहर निरंतर आगे बढ़ रही है~सतीश••’स्वदेशी-चिट्ठी’