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बांसवाड़ा मे ठेंगड़ी जन्मशताब्दी कार्यक्रम व भारत माता मंदिर के रामस्वरूप, महाराज जी व सुरेश जी के साथ

कल दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी कार्यक्रम के निमित्त राजस्थान के बांसवाड़ा में जाना हुआ।
कार्यक्रम तो बहुत अच्छा हुआ ही, साथ ही वहां पर भारत माता मंदिर ट्रस्ट बना है‌,वहां जाना हुआ। रामस्वरूप महाराज जी, (पुराने संघ के प्रचारक) हैं, उन्होंने 1991 में उस क्षेत्र में पहले से विश्व हिंदू परिषद द्वारा चल रही बांसवाड़ा परियोजना का काम देखना शुरू किया।

उनके और संगठन के बाकी प्रयासों से आज वहां पर 343 छोटे बड़े विद्यालय चल रहे हैं। यह जनजातीय क्षेत्र है, धर्मांतरण का काम ईसाई मिशनरी बड़ी मात्रा में करते थे। किंतु ‘जहां चर्च- वहां प्रकल्प’ यह योजना ली गई। परिणाम है कि वहां पर चल रहा धर्मांतरण रुक गया है। बल्कि बड़ी मात्रा में घर वापसी के कार्यक्रम भी हुए हैं।

मैंने रामस्वरूप जी व सुरेश जी, जो इसके सचिव हैं, से बात की। उन्होंने मुझे कहा “विगत 30 वर्षों से इतना हमारा ईसाई मिशनरियों के साथ संघर्ष रहता है, और भी विद्यालय या छात्रावासों में घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन एक बार भी किसी कार्यकर्ता पर एफ आई आर की नौबत नहीं आई।”

“यहां तक कि कुछ वर्ष पहले (कांग्रेस सरकार के समय) अपने एक छात्रावास में फूड प्वाइजनिंग से 30 बच्चे बीमार हो गए,एक की मृत्यु हो गई। लेकिन बनवासी लोगों ने ही कहा, कि “नहीं! इसमें इस संस्था के लोगों का कोई दोष हो ही नहीं सकता” और समाज के विश्वास के कारण ही पुलिस अधीक्षक ने एफ आई आर दर्ज करने से मना कर दिया। बल्कि ₹20,000 अपनी और से दिए ताकि भोजनालय व्यवस्थित किया जा सके।”

वनवासियों,जनजातीय लोगों की श्रद्धा और विश्वास के केंद्र को मैंने उन्हें प्रणाम किया और प्रस्थान किया.

~सतीश कुमार