Image may contain: 2 people, people standing, outdoor and water

हरिद्वार में राष्ट्रीय सभा के बाद,हर की पौढी पर कश्मीरी लाल जी के साथ

हरिद्वार में स्वदेशी की राष्ट्रीय सभा को सफल करने के लिए कितना परिश्रम अपने कार्यकर्ताओं ने किया। कुछ प्रसंग सुनिए!

*”अरे जितेंद्र जी! यह टेढ़ा होकर क्यों चल रहे हो?” “सतीश जी, बस यूं ही थोड़ी टांग की समस्या थी! पीछे मेरा एक्सीडेंट हो गया था और फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर लगा था। वैसे तो ठीक हो गया पर मैंने 5 दिन पहले ही प्लास्टर उतरवा लिया ताकि राष्ट्रीय सभा की व्यवस्था में भाग ले सकूं।थोड़ा ध्यान रखना पड़ रहा है बस।” और जितेंद्र यादवजी,अत्री कुमार जी व अन्य दो साथियों के साथ, 5 दिन, दिन-रात एक करके व्यवस्थाओं में लगे रहे।

*29 को सवेरे मैंने दीपक जी से पूछा “आंखें लाल सी क्यों हैं,भाई?”
थोड़ा संकोच से बोले “भाई साहब! रात भर एक भी मिनट सो नहीं पाया, शायद इसलिए होंगी। वैसे सब ठीक है।”

*फिर प्रांत संयोजक सुरेंद्र जी से पूछा “आर्थिक संग्रह कैसे कर रहे हो, तुम्हारी छोटी टोली है और इन्हीं दिनों में चार अन्य संगठनों के बड़े कार्यक्रम भी हैं?”
सुरेंद्र जी बोले “बस भाई साहब!सब मिलजुल के हमने इकट्ठा कर लिया है, दिक्कत नहीं आएगी। बल्कि केंद्र में भी भेज देंगे।”

*आने से पूर्व मैंने विपिनजी(भोजनालय प्रमुख) से अनुभव पूछा।
वह बोले “बस परसों एक अधिकारी भोजनालय में आए और बिना तथ्य जाने, डांटने लगे। एक बार तो मन में आया, ‘छोड़ चलु’! फिर सोचा नहीं अपना ही तो कार्य है और मैं लग गया।”

*ऐसे कितने ही प्रसंग हैं। डॉ राजीव जी, रामकुमार जी व अन्य 50 से अधिक कार्यकर्ता दिन-रात जुटे।
मैं सोच में पड़ गया कि टीम छोटी, कार्य बड़ा। किंतु कोई थका नहीं, हारा नहीं, निराश नहीं हुआ और लगातार काम करते रहे। क्योंकि उन्होंने सीखा ही है “चरैवेति चरैवेति…”