महात्मा गांधी-लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर पढ़ें उनके 15 अनमोल वचन (15  Famous Quotes Of Mahatma Gandhi And Lal Bahadur Shastri)

पुरानी बात है। एक दिन महात्मा गांधी जी प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू के आवास पर रुके। भोजन करने के लिए जब बैठने लगे तो उनके हाथ धुलवाने के लिए युवा जवाहरलाल नेहरू ने लोटा पानी उठाया।
गांधी जी बात कर रहे थे इसलिए पूरा लोटा-पानी उनके हाथ पर चला गया। जैसे ही नेहरू जी ने दोबारा पानी भरा,गांधीजी के ध्यान में आ गया। और उनके मुंह से निकला “अरे-अरे! यह क्या किया तुमने? ध्यान करना था।कितना पानी खराब कर दिया?”
तो नेहरु जी मुस्कुराते हुए बोले “महात्मा जी! यह प्रयागराज है।यहां गंगा जमुना दोनों बहती हैं। पानी की कोई कमी नहीं है। जितना मर्जी डालो!”

तो गांधी जी ने गुस्से होते हुए कहा “अरे! कैसी सोच है तुम्हारी?” इस गंगा और यमुना के पानी पर करोड़ों पंछियों, पशुओं जीवों वह स्वयं धरती-खेती का हिस्सा है। यदि मैं जरूरत से ज्यादा पानी अपने लिए प्रयोग करता हूं तो मैं किसी ना किसी का हिस्सा खींचता हूं। उसकी चोरी करता हूं, आवश्यकता से अधिक पानी लेना चोरी है, पाप है और वही पाप आज हो गया है।”

नेहरू जी को कितना समझ में आया,यह तो पता नहीं लेकिन आज की आवश्यकता के संदर्भ में इस प्रसंग को हम जरूर ध्यान रखें। और कितना जल हम अपने घर में रसोई में, स्नानागार-शौचालय में या अन्य स्थान से बचा सकते हैं, इसका विचार करें!
महात्मा गांधी जयंती व लाल बहादुर शास्त्री जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
स्वदेशी सप्ताह बहुत अच्छे से पूर्ण हुआ