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कोयंबटूर के केपीआर मिल्स के कुछ चित्र, सुंदरम जी हजारों महिला कर्मचारियों को संबोधित करते हुए

परसों कोयंबटूर में अर्थ एवं रोजगार सृजन सम्मान कार्यक्रम था। मुख्य वक्ता संघ के सह सरकार्यवाह भागैया जी थे,तो मुख्य अतिथि नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार जी और सम्मान प्राप्त करने वाले दो उद्यमी थे, कृषि, डेयरी क्षेत्र के आर,जी चंद्रमुगन तथा दूसरे थे, KPR मिल्स के डा: केपी रामास्वामी।
जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक सुंदरम जी का उत्साह से भरा मुझे फोन आया “सतीश जी!यह वास्तव में स्वदेशी उद्यमिता का उत्तम उदाहरण है, केपीआर!”
मैंने उनका जोश देखते हुए पूछा “ऐसी क्या विशेषता है इस उद्योग में?”
उन्होंने कहा “पहली बात तो यह है कि यह कोयंबटूर, तिरुपुर में 30000 लोगों को रोजगार देने वाला सशक्त केंद्र है,फिर इसकी विशेषता है कि इसके 90% कर्मचारी महिलाए है। और तमिलनाडु में उत्तर वालों से अलगाव की भावना के बावजूद बिहार, उड़ीसा से लेकर आसाम तक की महिलाएं ही इनकी ज्यादातर वर्कर हैं। क्योंकि सिलाई मशीन पर काम करना होता है तो उसमें उनको सुविधा भी रहती है।”

सुंदरम जी आगे बोले “लेकिन बड़ी बात क्या है की सायं 3:30 बजे के बाद वह चाहे तो आगे पढ़ाई करें चाहे तो अपने विकास के लिए कंप्यूटर सेंटर में जाएं या फिर बैडमिंटन खेलें सब प्रकार की उनके लिए मुफ्त व्यवस्था है। बहुत साफ सुथरा हॉस्टल,18000 लड़कियों के लिए है। कहीं पर भी आपको थोड़ी सी भी गंदगी नहीं मिलेगी। जूठन वहां कोई छोड़ता नहीं।शौचालय भी ऐसे साफ दिखे जैसे किसी कि 5 स्टार होटल के हों, और यही नहीं इन्होंने कोरोना की इस बीमारी में भी किसी का कोई वेतन काटा नहीं, उनको वहीं पर ही बैठाकर लगभग 2 महीने तक खिलाया। इसमें 30 करोड उनका अधिक लग गया।तब भी उन्होंने परवाह नहीं की।”
“इसका मतलब उनका टर्नओवर काफ़ी होगा?” मैंने पूछा।
तो वह बोले कि हां लगभग 4500 करोड़ का टर्नओवर है, 33 देशों में निर्यात करते हैं। इसके कारण से भारत सरकार को टैक्स के रूप में भी प्रतिवर्ष करोडों रुपए मिलते हैं।
सुंदरम जी के आग्रह पर मैंने कहा हां स्वदेशी की टोली इसका विस्तार से अध्ययन करने जरूर जाएगी।हमें तो हर जिले में इस प्रकार के उद्यम चाहिए तभी निर्यात भी बढ़ेगा और रोजगार भी।
~सतीश कुमार