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कल चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में ‘मेक भारत ग्रेट अगेन’ पर बोलते हुए कश्मीरी लाल जी व यमुनानगर के कार्यकर्ताओं के साथ

चार चरण का मतदान हो चुका है। सामान्य चुनाव विशेषज्ञों से लेकर, सट्टा बाजार तक इस बात पर सहमत हैं,कि भाजपा भारी बहुमत के साथ फिर से सरकार बनाने जा रही है।
कुछ बंधुओं से,इस लहर के दस प्रमुख कारण, चर्चा में आए, जो यहां लिख रहा हूं।
1.भारत में अब हिंदुत्व, व राष्ट्रवाद का भाव बहुत प्रबल है।भाजपा ने इसे पहचाना व अपना मुख्य चुनावी मुद्दा राष्ट्रवाद को ही बनाया। संकल्प पत्र से लेकर प्रज्ञा ठाकुर को खड़े करने तक के फैसलों से भाजपा ने स्पष्ट संदेश दिया कि हम हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के पक्षधर हैं।
2.भाजपा ने एक वर्ष पूर्व संगठनात्मक तैयारी की। देश के 10.30लाख बूथों में से 9लाख बूथों तक टीमें गठित कर दीं। बूथ से भी नीचे,पन्ना प्रमुख बनाए।उनके सम्मेलन किए,बड़ी सख्त मॉनिटरिंग की। ऐसा देशव्यापी नेटवर्क केवल भाजपा के पास ही है।
3.भाजपा,गठबंधन करने में भी बहुत आगे रही। इस समय 43 पार्टियों का गठबंधन है, भाजपा के एनडीए में। दूसरी तरफ महागठबंधन की बड़ी-बड़ी घोषणा करने वाले कांग्रेस व उसके सहयोगी दल अधिकांश प्रांतों में आपस में ही लड़- मर रहे हैं।
4.भाजपा के कुल 543 में से 415 अपने व 102 पर सहयोगी दल सीरियस फाइट में हैं। जबकि कांग्रेस व उसके यूपीए गठबंधन की फाइट ही केवल 250 सीटों पर है। उत्तर प्रदेश व बंगाल की 122 सीटों में से कांग्रेस गंभीरता से तो केवल 8 सीटों पर लड़ रही है। बाकी जगह पर तो केवल खानापूर्ति करनी पड़ रही है।
5.भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में टीम भाजपा ने सामाजिक समीकरणों, प्रांतीय/क्षेत्रीय भावनाओं का ध्यान रखते हुए टिकट वितरण से लेकर प्रचार तंत्र तक की व्यूह रचना की। जिसके आगे कांग्रेस व अन्य विपक्षी कहीं नहीं टिक पा रहे।
6.भाजपा ने अपने 275 सांसदों में से, केंद्रीय मंत्रियों सहित 103 का टिकट काट दिया इससे एंटी इनकंबेंसी फैक्टर को काबू में किया। इतनी बड़ी मात्रा में सांसदों के टिकट काटने की भाजपा नेतृत्व ने हिम्मत दिखाई।उसका लाभ मिला।
7.भाजपा को देश भर में फैले संघ परिवार के व्यापक संगठनों का,जिनका जमीनी स्तर पर बहुत बड़ा नेटवर्क है, काम है,सक्रिय सहयोग मिल रहा है।
8.फिर पुलवामा वा बालाकोट एयर स्ट्राइक कर मोदी ने अपनी मजबूत व जुझारू नेता की छवि स्थापित कर ली और कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने सबूत मांग कर सारे देश की सामान्य जनता को अपने विरुद्ध कर लिया।यह विपक्षियों की बड़ी चूक थी।
9.कांग्रेस के पास अपनी न्याय योजना,व अन्य लोकलुभावन नारों को नीचे तक ले जाने का तंत्र ही नहीं है। इसलिए लालच देने के बावजूद भी विषय नीचे तक नहीं जा रहा।
10.फिर सबसे बड़ी बात! नरेंद्र मोदी के विकासशील, परिपक्व व वैश्विक नेतृत्व की तुलना में लोगों के जनमानस में,कांग्रेस का नेतृत्व कहीं नहीं टिकता।यद्यपि राहुल अपनी बचकाना नेतृत्व की छवि से बाहर आए हैं।इति।