सुंदरम जी व 3 दिन पहले कोरोना की दूसरी ड़ोज लगवाते हुए मैं स्वयं
कल अपने अखिल भारतीय संयोजक (स्व.जा.मंच) सुंदरम जी ने कोरोना के समय पर किए गए सेवा कार्यों के दो प्रसंग बताए।
अप्रैल के अंतिम दिनों में उन्हें सेलम के डिप्टी कमिश्नर का फोन आया, “सुंदरम जी! सरकारी हॉस्पिटल में 100 मरीज ऐसे हैं, जिनके लिये आक्सीजन अगले 3 घंटे में खत्म होने वाली है। और कोई सोर्स नहीं है। केवल एक है जिंदल स्टील प्लांट। वहां से इमरजेंसी में ऑक्सीजन मिल सकती है। किंतु एमडी मेरा फोन नहीं उठा रहा, आप कुछ कर सकते हैं क्या?
सुंदरम जी बोले, “मैंने तुरंत एमडी को फोन किया पर वह नहीं उठा रहा था। तब मैंने ऑफिस में फोन किया तो पता चला वह एयरपोर्ट पर गए हैं। दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ना है। मैंने आफिस की महिला से कहा, “टॉप इमरजेंसी है, एमडी से कहो, मैं सुंदरम RSS वाला बोल रहा हूं। प्लेन पर चढ़ने से पहले मेरे से अवश्य बात करें।”(एमडी सुन्दरम जी का परिचित था)
उनके सहायक ने फ्लाइट में बैठने से पहले उन्हें फोन पकड़ा दिया। सुंदरम जी ने उससे कहा, “कुछ भी करो, चाहे फ्लाइट छोड़ो या जो भी, पर तुरंत ऑक्सीजन भेजो, समय बहुत कम है।”
एमडी ने कहा, “आप चिंता ना करें, मैं कुछ व्यवस्था करता हूं।” सब तरफ फ़ोन बजने लगे।
और 2 घंटे 30 मिनट बाद हॉस्पिटल से ही डिप्टी कमिश्नर का फोन आया “सुंदरम जी! ग्रेट थैंक्स टू यू, ऑक्सीजन हैज रीचड यानि ऑक्सीजन पहुंच गयी है।”
और इस तरह समय से आधा घंटा पहले ऑक्सीजन पहुंचने से 100 लोगों की जान बच गई।
~सतीश कुमार