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ओला बाइक वाले राजीव के साथ एक सेल्फी
कल मैंने कुछ संगठनात्मक विषयों पर बातचीत करने के लिए पटना में रहने वाले अपने अखिल भारतीय सह संयोजक अरुण ओझा जी से फोन किया। बाकी बातचीत के बाद मैंने पूछा “बिहार में तो चुनाव चल रहा है, क्या स्थिति है, क्या लगता है?”
वह बोले “यद्यपि नीतीश कुमार ने काम तो बहुत किया है और सामने तेजस्वी यादव की पार्टी भ्रष्ट भी है, लेकिन उसने जो 10 लाख युवकों को रोजगार देने की बात की है, उस पर बिहार के युवा तो फिदा हैं।”
फिर मैंने एक दो और लोगों से फोन किया पूछा “ऐसी क्या बात है, भाई?”
तो वे बोले “इस समय पर युवा लोग इतने बेरोजगार हैं कि उन्हें यह पता भी है कि तेजस्वी के पास कोई जादू की छड़ी तो नहीं है, पर फिर भी पता नहीं, बाकी के मुद्दे सुशासन, विकास, इसकी तो कोई बात ही नहीं कर रहा एक ही बात है रोजगार, रोजगार!”
बाद में मैं यहां कार्यालय पर स्वदेशी थिंक टैंक के 2-3 बंधुओं से बात करने लगा। उनका भी कहना था कि हमें व सरकार को, इस युवा शक्ति को स्वरोजगार व उद्यमिता की तरफ मोड़ने की योजनाएं करनी होंगी। अन्यथा यह युवा शक्ति की आग रचनात्मक न होकर देश को जला भी सकती है।
वेदना: कल जब मैं करोल बाग से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के कार्यालय पर जा रहा था तो बाइक वाले ने बताया कि पहले लॉकडाउन के 2 महीने बहुत दर्दनाक बीते। सारा दिन ₹100 की भी कमाई नहीं होती थी। घर में जाते हुए डर लगता था कि बच्चे पूछेंगे “पापा क्या लाए? तो क्या जवाब दूंगा। उन दिनों में बहुत परेशानी, वेदना हुई।अब कुछ ठीक है।”
~सतीश कुमार