आदरणीय बाबा जी! सादर प्रणाम!
आज आपको यह पत्र एक विशेष कारण से व एक स्वदेशी कार्यकर्ता के नाते लिख रहा हूं!
सबसे पहले तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप ने योग व आयुर्वेद को करोड़ों भारतीयों ही नहीं विदेशियों तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है!
किंतु गत कुछ समय से देश में यह भाव आ रहा है कि आप शुद्ध रूप से पैसा कमाने में लग गए हैं! अभी-अभी आपने डेयरी उद्योग व कपड़े बेचने के 500 स्टोर खोलने की घोषणा की है! 20 लाख करोड़ रुपए तक कि कंपनी बनाने की बात की है!
आप कर सकते हैं!कर भी लेंगे!लेकिन एक स्वदेशी कार्यकर्ता के नाते से मेरा एक निवेदन है कि आप अपनी भूमिका के बारे में पुनः विचार करें।
मैंने बचपन में एक कथा सुनी थी,आपने भी सुनी होगी!
एक साधु था! उसकी लंगोटी को चूहे कुतर जाते थे!तो किसी की सलाह पर उन चूहों से निबटने के लिए बिल्ली पाली! बिल्ली को दूध चाहिए तो इसलिए गाय रख ली! गाय की सेवा कैसे करें तो एक महिला चाहिए और अंततः वह साधु गृहस्थ हो गए! लंगोटी की रक्षा करने के फेर में अपनी फकीरी खोना कितना उचित है? प्रचारक होने के कारण से यह बात मैं आपको कह सकता हूं!
योग के प्रसार प्रचार के लिए आपने आश्रम खोला!बड़े आश्रम को चलाने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां बेचनी शुरू कीं? टूथपेस्ट और साबुन बेचने शुरू किए! अब उनको जमाने के लिए जो काम उद्योगपति और कंपनियां करती हैं,कुछ अच्छे- कुछ बुरे.. ज्यादातर बुरे ही,वह सब आपकी कंपनी को भी करने पड़ते होंगे!
आपकी आयुर्वेदिक दवाइयों की ग्रोथ रेट 52% से 7% पर आ गई है! अब कंपनी को बढ़ाने के लिए आपने डायरी व कपड़ा उद्योग में जाना तय किया है!
पर ध्यान रखिएगा बाबा जी!इस देश ने साधु-सतों
योगियों पर बहुत विश्वास किया है! उनके विश्वास को हिलाने का अधिकार आपको भी नहीं है!
इस देश के पास अंबानीयों,अदानीयों की कमी नहीं है! व्यापारियों,कंपनियों की कमी नहीं है!
किंतु योग,आयुर्वेद,राष्ट्रवाद, स्वदेशी…उसकी कमी है, उसके कारण से ही इस देश की जनता ने आपको सर आंखों पर बिठाया! आप यदि योग वा जनस्वास्थ्य को अपने जीवन का मिशन बनाएंगे तो इतिहासिक महापुरुष हो जाएंगे! देश आपको इसी रूप में चाहता है!
इस देश की जनता का यह विश्वास आप बनाए रखेंगे, बल्कि बढ़ाएंगे,तो देश की जनता आपके साथ!
अन्यथा जनता देर भी नहीं लगाती है! क्योंकि जनता की आस्था योग,आयुर्वेद, स्वदेशी में है…आपने उसका प्रचार किया,अत:आपके साथ हुई!अगर आप उसे छोड़ पैसा कमाने में लगे तो वह(जनता) आपको छोड़ किसी और को देखेगी!
इस देश की अपेक्षा क्या है! वह मैंने आपको निवेदन कर दी है। बाकी हम सब भारत मां की सेवा करने में लगे ही हैं!…जय भारत! वंदे मातरम!