प्रसिद्ध मैसूर महल व् मेले में चल रहे अर्जुन बबरीक युद्ध का दृश्य
हरियाणा के सोनू ने अपनी कहानी बतायी” मैं ग्रेजुएशन करने के बाद एयरटेल मे 8 महीने नौकरी करता रहा पर सिर्फ़ 7-8000 ही कमा पाता था, फिर अपना काम करने की सोची!पास मे केवल 17000 रूपये थे!पर मैंने एक दोस्त से शीशे लगाने का काम थोड़ा सीखा हुआ था। उसी का ही उपयोग करते हुए काम शुरू कर दिया। दिनरात मेहनत करता रहा, 5-6 लड़के रख लिए… पर बीच मे ही एक बडी पार्टी ने मेरी बडी पैमेन्ट मार ली। मैं निराश हो गया पर पिताजी, पत्नि व दोस्तों के हिम्मत बँधाने पर फिर शुरू किया। आज 9साल बाद मेरा वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ है! 60 लडको को भी रोजगार मेरे से मिल रहा है!” आगे का क्या प्लान है?” मैंने पूछा तो वह बोला “शायद आनलाइन मे भी हाथ आज़माऊँ, यदि प्रभु कृपा ऐसी ही रही तो एक दिन…” सोनू एक जिले का संयोजक है-स्वदेशी का! कल मैसूर के एक बड़े संस्थान मे रोजगार केन्द्रित स्वदेशी विकास माडल पर बोलते हुए मैने युवाओं को आह्वान किया “Enterpeneurship व स्वरोज़गार की तरफ़ जाओ” मैंने उन्हें ऐसे ही उदाहरण दिए!
रात मे बैंगलोर में चल रहे स्वदेशी मेले मे पहुँचा! पाटीदार समुदाय के विशाल सामुदायिक भवन मे लगे मेले के बारे एक शब्द पर्याप्त होगा- ‘अद्भुत’! लघु उद्योगों के उत्पादों की ख़रीद हज़ारों लोग व प्राचीन हिन्दु संस्कृति का दर्शन.. सबकुछ यहाँ देखा मैंने।…’जयतु भारतम्’