Image may contain: 3 people, people standing and outdoor

हम दोनों पुराने प्रचारक

परसों दिल्ली के प्रचारकों (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के अभ्यास वर्ग के अंतिम दिन हम विविध क्षेत्र के पुराने प्रचारकों का भी जाना हुआ।
हम लोगों को सुखद अहसास हुआ कि नये प्रचारक न केवल लगातार निकल रहे हैं, बल्कि वे अधिक योग्य और अधिक उत्साह वाले भी हैं।

जैसे, एक प्रचारक ने बताया “मैं 14 साल से नेवी में ऑफिसर था किंतु बीच-बीच में शाखा और संघ शिक्षा वर्ग में आता था और अभी एक साल पहले वीआरएस लेकर प्रचारक बना हूं।
एक दूसरा युवक (प्रचारक) मिला। वह उड़ीसा का है। उसी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में, जिसमें देश के खिलाफ बोलने वाले लड़के भी हैं, किंतु वहीं यूनिवर्सिटी की शाखा से निकला यह प्रचारक आजकल दिल्ली विश्वविद्यालय का काम देख रहा है। एक तीसरा नया विस्तारक वह भी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी करके निकला है।

कोई कॉमर्स से पोस्ट ग्रेजुएट है, तो किसी ने बीटेक किया है। गत 5-6 वर्षों में ही 30 नए प्रचारक आए हैं। अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि, उच्च स्तर की पढ़ाई, कुछ मां बाप के इकलौते बेटे भी, किंतु जब देश कार्य की धुन लगती है तो भविष्य, सुख, कैरियर सब छोड़कर प्रचारक निकलते ही हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्माण प्रक्रिया यह भारत में नहीं, दुनिया में ना केवल श्रेष्ठतम है, बल्कि अपने आप में अनूठी है।
जो सुख मां बाप को अपनी युवा होती संतान को देखकर होता है, हम पुराने प्रचारकों को भी अपने नए विस्तारक प्रचारक देखकर कुछ वैसे ही सुख की अनुभूति होती है। कल बैठक से निकला तो गीत याद आ रहा था…मन मस्त फकीरी धारी है…अब एक ही धुन जय जय भारत!