Image may contain: 7 people

Image may contain: 4 people, people standing and outdoor

किसानो एवं डेयरी सेक्टर की महिलाओं द्वारा RCEP का विरोध एवं स्वदेशी जागरण मंच की टीम।

1. डेयरी एवं कृषि सेक्टर, स्टील, रब्बड़, प्लास्टिक एवं अन्य संबंधित उद्योगों ने इसका खुल कर विरोध किया था।
2. इस विषय पर स्वदेशी जागरण मंच ने एक वर्ष पूर्व से विधिवत तैयारी की थी और पूरी तरह से इसके लिए आंकड़े इकट्ठा करने से लेकर सेमिनार करना और एक वर्ष पूर्व अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा स्वदेशी के जिला स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा ज्ञापन देना, प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रम भी किए गए।
3. अन्य संगठन जो समाज हितैषी हैं, किसानों के एनजीओ, ऐसी संस्थाएं जो की चाइना को भारत में प्रवेश न करने से संबंधित थी, पर्यावरण से संबंधित संस्थाएं, और आर्थिक शिक्षाविद, ये सब लोग भी अपनी अपनी तरह से लगातार इस समझौते के दुष्प्रभावों के बारे में चर्चा कर रहे थे, इससे व्यापक स्तर पर जनजागरण हुआ।
4. इसके कारण से पहले भाजपा, फिर कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी बाद में इसका विरोध करना शुरू किया। जो की अंतोतगत्वा इसका निर्णायक कारण भी बना।
5. क्योंकि इस समझौते की शुरुआत 2012 में ही कांग्रेस के समय पर शुरू हो गई थी, लेकिन शुरू के 3-4 वर्षों में इसके बारे में ज्यादा विचार नहीं हुआ था। लेकिन पिछले कुछ समय से मोदी जी के नेतृत्व में पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण जैसे मंत्रियों ने इस समझौते के फायदे और नुकसान का आंकलन करना शुरू किया। और अंतोतगत्वा मोदी जी ने बैंकॉक में इस समझौते पर हस्ताक्षर ना करने का घोषणा की।

अंतोतगत्वा भारत का उद्योग जगत और कृषि जगत विजयी हुआ।
विजयी हुआ भारत, स्वदेशी भारत।

~सतीश कुमार