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जम्मू से वापसी पर पठानकोट के कार्यकर्ताओं के साथ स्टेशन पर

कल मेरा जम्मू में दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी की बैठक हेतु प्रवास था। स्वदेशी व जन्म शताब्दी के विषय तो हुए ही बाद में कार्यकर्ताओं से बातचीत हुई।
मैंने पूछा “370 हटने के बाद से क्या फर्क है?
विजय जी बोले “जम्मू में तो इस समय सब सामान्य ही नहीं बल्कि उत्साह का माहौल है। यहां तक कि राजौरी पूंछ भद्रवाह के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी सब बढ़िया चल रहा है।”

फिर मैंने कहा “जम्मू तो ठीक है, कश्मीर का क्या हाल है?”
तो वह बोले “मैं गत सप्ताह वहां गया था। अब सवेरे शाम दुकानें खुलने लगी हैं। ऑफिस खुले हैं। स्कूल खुले तो हैं हां!उनमें उपस्थिति अभी काफी कम है। किंतु 2500 से अधिक छोटे बड़े नेता, पत्थरबाज व अन्य शरारती तत्व, ये देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं। इसलिए वहां पर अभी किसी प्रकार के कोई प्रदर्शन, अथवा फसाद होने की स्थिति नहीं है।”

इस पर एक बहन बोली “हमेशा हम ही डरे रहते थे, अब पहली बार कश्मीर घाटी के लोग डरे हैं। यह देश के लिए तो अच्छा है ही,उनके लिए भी ठीक है।”
और लद्दाख के बारे में बताया “वहां तो दिवाली का ही माहौल है। यूनिवर्सिटी वहां खुल रही है।केंद्र शासित प्रदेश बन गया है वह तो देश में इस समय पर सबसे खुशहाल लोगों का प्रदेश हो गया है।”
बाद में एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने कहा “कि यदि अभी चुनाव हों तो जम्मू व लद्दाख में हम क्लीनस्वीप करेंगे।”

नए राज्यपाल से सब लोग संतुष्ट हैं। प्रशासन व सुरक्षा बल मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। यह भी सच है कि गत 4 महीने से एक भी व्यक्ति पुलिस की गोली से मरा नहीं है जबकि पहले हर महीने दो-तीन लोग अल्लाह को प्यारे हो ही जाते थे।
देश की एकता अखंडता हेतू किया गया आपरेशन (370 हटाना) लगता है सफल हो रहा है।