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स्वदेशी के प्रथम बलिदानी बाबू गेनू के गांव में बने स्मारक पर(जो पूणे से ६५ किमी दूर है)पर बैठक के बाद कार्यकर्ता श्रद्धांजलि अर्पित करने गए।

भारत को भारत कहो, इंडिया नहीं।
आज पूणे की स्वदेशी बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ…’भारत को भारत कहो इंडिया नहीं’।
क्यों किया ऐसा? वास्तव में किसी भी व्यक्ति या देश का नाम उसके गुण,संस्कृति, इतिहास का परिचय देता है।
“यदि मैं अपना नाम अब्दुल्ला या स्टीफन बोलूं तो तुरंत मेरे बारे में धारणा एक विशेष प्रकार की हो जाएगी।है न?”
“लेकिन मेरा नाम सतीश है,तो वह दूसरे प्रकार का परिचायक है, ठीक?”
हमारे देश का नाम अंग्रेजों ने भारत से बदलकर इंडिया कर दिया। और जब भारत आजाद हुआ तब भी संविधान सभा में इस पर एक दिन लंबी बहस व अनेकों के आग्रह के बाद भी अंततः ‘इंडिया दैट इज भारत’ ऐसा लिखा गया।
किंतु अब वक्त आ गया है कि जब हमें अपना परिचय #भारत से ही कहना चाहिए। हम अपना नाम अंग्रेजों का दिया हुआ क्यों रखें?
जबकि हमारे पुरखों ने विष्णु पुराण में लिखा है,
“उत्तरं यत समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम
वर्षम तद भारतम् नाम भारती यत्र संतति।”
तो अब स्वदेशी जागरण मंच ने यह तय कर लिया है और संपूर्ण देश में इस पर बहस होनी चाहिए कि इसको कैसे सारे देश और दुनिया में मान्यता मिले।
आपका इस विषय में क्या कहना है?