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आज सवेरे शाखा के बाद कुछ बंधुओं ने मेरे से चर्चा की। “अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर डेमोक्रेट पार्टी के जो बिडेन जीत गए हैं, यह हमारे लिए अच्छा हुआ या नहीं?”
तो मैंने कहा “अमेरिका हर एक बात में अपना हित देखने वाला देश है।उस नाते से उसका जो भी राष्ट्रपति बने इस समय उन्हें भारत की जरूरत है,इसलिए ठीक ही रहेगा।वैसे वह 78 वर्ष के हैं,अनुभवी हैं।4 महीने पहले हुए लेमोआ समझोता (भारत से सैन्य विमान व अन्य सुविधाएं लेने-देने का विषय) कराने में उनकी बड़ी भूमिका थी।चीन के वे सख्त विरोधी हैं,रहेंगे भी।”
●[हरियाणा सरकार ने दिवाली पर पटाखों की बिक्री का प्रतिबंध हटा लिया है,बधाई!इसमें स्वदेशी के प्रयत्न भी शामिल हैं]
“हां।पाकिस्तान के प्रति थोड़े लचीले हैं लेकिन उसका भी फायदा हमें मिलेगा। वे 1988 में भी राष्ट्रपति पद की तैयारी में थे पर रह गए। 2016 में उनके 46वर्षीय पुत्र की मृत्यु हो गई(एक एक्सीडेंट में)जो स्वयं राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की सोच में था।इसलिए अमेरिका के अब तक के सबसे बड़ी उम्र के राष्ट्रपति की, इच्छाशक्ति की दाद तो देनी ही चाहिए।”
कल एक कार्यकर्ता की पोस्ट देखी कि,”उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की मां भारत की है इसकी बधाई। लेकिन यहां यह स्पष्ट रहना चाहिए कि वह विचारों से हमारे अनुकूल नहीं है।कश्मीर के मुद्दे पर वह भारत विरोधी लगातार बयान देती रही हैं।उपराष्ट्रपति बनने से कुछ संयम आ जाएगा अलग बात है।
किंतु भारत इस समय पर मजबूत स्थिति में है और हो रहा है। इसलिए अमेरिका के यह दोनों नेता भारत के अनुकूल ही रहेंगे,विरोधी नहीं बन सकते। हां 5 लाख भारतीयों को वीजा व H1b मामले में राहत मिलने से ठीक रहेगा।बाकी कुछ दिनों में और स्पष्ट होता जाएगा
~सतीश कुमार