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चौपाल के कार्यकर्ताओं की बैठक मेँ

आज मैं दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर जो स्वदेशी का कार्यालय है,उसमें अपने ‘चौपाल’ टीम के बंधुओं की बैठक में था। मैंने अनुभव पूछा तो एक कार्यकर्ता राकेश विरमानी ने बताया
“2 साल पहले मेरे घर के नजदीक की बस्ती से एक युवा पर गरीब रिक्शावाला आया।” और बोला “सर! मेरे पास केवल ₹2000 हैं पर यदि आप मुझे ईरिक्शा दिलवा दो,तो पक्का है, मैं उसकी सारी किश्तें हर सप्ताह देता रहूंगा।”
“वह अपने साथ अपने दोस्त को भी लेकर आया था जो अब चौपाल के सहयोग से ई रिक्शा चलाता था।”

पर मैंने कहा “अगर कम से कम तेरे पास ₹13000 हों, तो 1लाख रुपए बैंक लोन मिल जाएगा, 20000 हम देते हैं। तो ई-रिक्शा मिल जाएगी।”
पर उसने कहा “सर! मेरे पास ₹13000 इकट्ठा होने में तो 6 महीने लग जाएंगे! आप मेरा विश्वास करो! मुझे किसी तरह दिलवा दो।”

तो चौपाल के इस कार्यकर्ता ने स्टेट बैंक के मैनेजर से बात की। मैनेजर ने उसकी स्थिति जान कर कहा
“यह किश्त दे ही नहीं पाएगा।लोन देने से क्या फायदा?” कार्यकर्ता ने कहा “अरे! तुम्हारे करोड़ों रुपए मर जाते हैं, आप लोग परवाह नहीं करते। पर मेरे कहने पर इस गरीब को एक लाख देने का विश्वास नहीं कर सकते?”

खैर! कुछ उसने हिम्मत की, कुछ कार्यकर्ता ने इकट्ठे करवा ₹13000 बैंक में जमा करवाएं, तो बैंक ने लोन दिया। और ई-रिक्शा आ गई।
2 साल से वह ईमानदारी से अपनी किस्त देता रहा। 6 महीने बाद उसकी बैटरी खत्म हो गई,तो उसकी ईमानदारी और मेहनत की बात सुन महिंद्रा कंपनी ने उसको फ्री बैटरी दे दी।

20 दिन पहले हुए एक कार्यक्रम में उसी दीपक ने बताया “अब मेरे पास बैंक में अपने ₹30000 हैं। हर महीने अपने घर भी कुछ पैसे भेज देता हूं। मेरा सपना है,मेरे बैंक में ₹1लाख हों,यानी मैं भी लखपति बन जाऊं।” उसकी जिंदगी बदल गई है।

स्वदेशी का यह प्रकल्प दिल्ली में ही 30,000 से अधिक महिलाओं को लघु ऋण वितरण करके उनकी जिंदगी में आर्थिक समृद्धि का परिवर्तन ला चुका है।एक चुपचाप हो रही,स्वदेशी की साधना।
‘गरीबी मुक्त- रोजगार युक्त’ भारत के स्वप्न को साकार करते प्रकल्प के सूत्रधार हैं स्वदेशी के पुराने कार्यकर्ता अपने भोलानाथ विज। और उनके साथ हैं, स्वदेशी जागरण मंच दिल्ली के पूर्व प्रातं संयोजक जितेन्द्र महाजन व एक पूरी टीम।

~सतीश कुमार