प्रणाली को आईआईटी बम्बई (मुम्बई) के जैवविज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में परीक्षण के बाद सत्यापित किया जा चुका है।

मौजूदा समय में मास्क और पीपीई किट की मांग सबसे अधिक है। मुंबई के एक स्टार्टअप ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिसके द्वारा पीपीई किट और मास्क का इस्तेमाल फिर से किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्य के कई अस्पतालों में किया जा रहा है। मास्क और पीपीई किट का फिर से इस्तेमाल होने से एक तरफ जहां कोविड-19 जैव अपशिष्ट को कम करने में सहायता मिलती है। इसके साथ ही इससे पर्यावरण को भी दुरुस्त रखने में सहायता मिलती है।

इस प्रणाली को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बम्बई (मुम्बई) के जैवविज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में परीक्षण के बाद सत्यापित किया जा चुका है और इसे विषाणुओं और जीवाणुओं को निष्क्रिय करने में 5 एलओजी (99.999 प्रतिशत) से अधिक प्रभावपूर्ण पाया गया है। इसे सीएसआईआर –एनईईआरआई से भी स्वीकृति मिल चुकी है और यह आईपी55 प्रमाणित भी है।

इस प्रणाली को स्टार्ट-अप इंद्र वाटर ने बनाया है। इसके लिए स्टार्टअप को एसआईएनई- आईआईटी बम्बई के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से अनुदान मिला था। एसआईएनई-आईआईटी बम्बई की सहायता से इस स्टार्टअप ने हर महीने 25 विसंक्रमण प्रणालियाँ बनाकर उनकी आपूर्ति करने के लिए अपने आप को तैयार किया।

ये हैं वज्र कवच

इस उत्पाद में एक बहुचरणीय विसंक्रमण प्रणाली का उपयोग किया जाता है जिसके अंतर्गत पीपीई किट में कोरोना संक्रमण से निकले विषाक्त तत्वों, विषाणु (वायरस), जीवाणु (बैक्टीरिया) को यूवी–सी प्रकाश स्पेक्ट्रम के माध्यम से 99.99 प्रतिशत प्रभावशीलता तक निष्क्रिय किया जा सकता है। वज्र कवच नाम की विसंक्रमण (डिसइंफेक्शन) प्रणाली की मदद से पीपीई किट,मास्क को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे महामारी से लड़ने की लागत को काफी कम करने और अत्यधिक मात्रा में बनने वाले कोविड-19 जैव अपशिष्ट को कम करने में सहायता मिलती है। इससे पर्यावरण ठीक रखने में भी सहायता मिलती है। यह प्रणाली व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों को उचित एवं तकर्संगत मूल्यों पर अधिक मात्रा में सबके लिए उपलब्ध भी करवाती है।