भूमिका
भारत एक विशाल देश है जिसके कोने कोने में  उद्यमशीलता से परिपूर्ण लोग भरे पड़े हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति है तमिलनाडु के तिरुपुर से 15 किलोमीटर दूर एक छोटे से ग्राम में एक किसान परिवार में जन्मे ए सी इस्वरन। इन्होने एक ऐसा प्रयास किया जिसने उस क्षेत्र की दशा ही बदल दी। बात वर्ष 1954 की है जब इस युवा ने होजरी के एक कारखाने में काम करना शुरू किया। ध्येय था कि एक दिन अपना उद्यम स्थापित करना है अत: इस व्यवसाय से जुड़े सभी पहलुओं जैसे कताई, बुनाई, रंगाई व इसका विपणन इत्यादि को सीख लेने की इच्छा के साथ इन्होने 1954 से प्रारम्भ कर के 10 वर्षो तक इस व्यवसाय में कार्य किया। इसके बाद  इन्होने अपना उद्यम खड़ा करने की योजना बनाई।

विकास यात्रा
वर्ष1964 में इन्होने आनंद होजरी के नाम से अपना व्यवसाय प्रारम्भ किया। शुरुआत में इस होजरी में बनियान, मोजे इत्यादि अंत:वस्त्र बनाये जाने लगे। अच्छी गुणवत्ता व कम कीमतों के कारण इनका व्यवसाय चल निकला। फिर वर्ष 1972 में वाइकिंग निटर्स के नाम से एक नया उद्यम शुरू किया। धीरे धीरे इनका व्यवसाय पूरे दक्षिणी भारत व उत्तर भारत के कुछ प्रदेशों में फैल गया तथा वर्ष 1976 में इन्होने वाइकिंग ब्रांड नाम से कार्य करना शुरू किया।

इसके बाद वर्ष 1984 में तिरुपुर में ब्लीचिंग व रंगाई के लिए  एक कारखाना लगाया। फिर वर्ष 1996 में श्री इस्वरन ने वाइकिंग टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की। तब इसकी क्षमता 30000 स्पिंडल्स पर 10 टन सूती धागा प्रतिदिन बनाने की थी। इसके बाद वर्ष 2000 में कंपनी ने वाइकिंग के नाम से शर्टस व धोती बनाने का काम शुरू किया। जिसके बाद कंपनी ने सिले वस्त्र बनाने के लिए वर्ष 2003 में तिरुपुर के पास अविनाशी नामक जगह में आनंद टेक्सटाइल्स नामक कंपनी की स्थापना की। इस कम्पनी में पुरुषों, महिलाओं व बच्चो के सब प्रकार के बाहर पहनने के व अंत: वस्त्रों का निर्माण करती है।

इन सब कार्यों के साथ कम्पनी ने अपना विकास व विस्तार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी किया। कम्पनी के पास तमिलनाडु में 10 मेगावाट क्षमता के 12 संयत्र हैं जिनमें पवन से ऊर्जा बनाई जाती है। इनके साथ कम्पनी का एक सोलर पावर प्लांट भी है। इस प्रकार यह कम्पनी न केवल अपनी आवश्यकता की 90% ऊर्जा स्वयं उत्पादित करती है बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा पर्यावरण के लिए भी अच्छी होती है। इस से कंपनी समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का अच्छे से निर्वहन कर रही है। कम्पनी ने प्राथमिक शिक्षा के  क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है।

कंपनी का नाम वाइकिंग रखने पीछे भी एक कहानी है । यह नाम 1960 के दशक में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए वाइकिंग नाम के रॉकेट से प्रेरित है। जबकि आनंद नाम श्री इस्वरन ने अपनी बहन आनंदी से प्रेरित होकर रखा था। आज तिरुपुर लगभग ₹60,000 करोड़ का माल निर्यात करता है। इसके साथ पूरे क्षेत्र के विकास के लिए तिरुपुर के आस पास के क्षेत्रों में 10-20 किलोमीटर के अंतर पर छोटे छोटे टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए गए हैं। इस प्रकार तिरुपुर स्वदेशी आधारित विकेंद्रीकृत विकास का एक अच्छा उदाहरण बन गया है।

आज कम्पनी में कुल 5000 कर्मचारी काम करते हैं। कम्पनी ने अब तक 1200 के लगभग औद्योगिक प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। कम्पनी के 4 कार्यालय भारत में तथा 1 कार्यालय भारत के बाहर स्थित है। इस प्रकार वाइकिंग भारत का सफल स्वदेशी उद्यम बन गया है।