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सफेद चंदन की खेती किसानों के लिए धनवर्षा का स्रोत बन रही है।  इसकी खास तरह की खुशबू और इसके औषधीय गुणों (Medicinal properties) के कारण पूरी दुनिया में इसकी भारी डिमांड है। भारत में इसकी एक किलोग्राम लकड़ी दस हजार रुपए में बिक रही है। वहीं, विदेश में सफेद चंदन की एक किलो लकड़ी की कीमत 20 से 25 हजार रुपये है।

खास बात यह है कि चंदन की खेती में लागत बहुत कम आती है और मुनाफा बहुत होता है। इसकी खेती करने वाले किसानों का कहना है कि एक एकड़ जमीन में सफेद चंदन की खेती पर करीब 80 हजार रुपये का खर्च आता है और इससे 60 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है।

सफेद से निकलने वाला तेल और लकड़ी दोनों ही दवाई (medicine) बनाने के काम आती हैं। इसके अर्क को खान-पान में फ्लेवर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। सफेद चंदन के तेल को खुशबू के तौर पर साबुन (soap), कॉस्मेटिक्स (cosmetics) और परफ्यूम (perfume) में इस्तेमाल किया जाता है। सफेद चंदन की जड़ों में तेल अधिक होता है। एक किलो चंदन की लकड़ी से करीब 100  ग्राम तेल निकलता है।

इन वजहों से है भारी डिमांड

बाजार में इसके तेल की भारी डिमांड (demand) की कई खास वजहें हैं। सफेद चंदन के तेल का सेवन करने से चेहरे का रुखापन दूर होता है। साथ ही इसका लेप लगाने से तेज बुखार में आराम मिलता है। गुलाब जल और कपूर के साथ इसका लेप सिरदर्द को खत्म कर देता है। इसके अलावा यह कई बीमारियों में लाभदायक है। जर्मनी की मोनास्टेरियम लैबोरेटरी के शोध में दावा किया गया है कि रोज रात में चंदन के तेल से सिर की अच्छे से मालिश करने से सिर पर नए बाल उगने लगते हैं। इस शोध ने गंजेपन के इलाज (baldness therapy) के लिए असरदार दवाओं की खोज की उम्मीद जगा दी है।

हाइपरटेंशन (hypertension), हाई ब्लड प्रेशर (blood pressure) में भी इस चन्दन का प्रयोग लाभदायक साबित हो रहा है। इसकी कुछ बूंद दूध में डालकर रोज पीने से ब्लड प्रेशर संतुलित होता है। इसका तेल मस्तिष्क के सेल्स को उत्तेजित करता है, जिसके कारण दिमाग और याददाश्त तेज हो जाती है।

किसानों को हो रहा खूब मुनाफा

गोरखपुर में सफेद चंदन की खेती करने वाले अविनाश कुमार का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में सफेद चंदन का भाव आसमान छू सकता है। चंदन की खेती में मोटी कमाई है। उन्होंने कहा कि मात्र 80 हजार से एक लाख रुपए लगाकर 60 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है। अविनाश पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद खेती में लग गए। उन्हें  बेंगलुरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च (आईआईएचआर) के वैज्ञानिकों ने कई औषधीय पौधों की खेती का प्रशिक्षण दिया है।

पहाड़ और रेगिस्तान में भी हो सकती है खेती

सफेद चंदन का पेड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी प्रदेशों में भी लगाया जा सकता है। राजस्थान के छीपाबड़ौद के किसान नवलकिशोर अहीर ने चंदन की खेती कर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे कृषि विभाग भी हैरत में है। लगभग एक साल पहले नवलकिशोर ने चंदन के 351 पौधे कर्नाटक से मंगवाए थेष इनमें से कुछ पौधे नष्ट हो गए, लेकिन बाकी बचे पौधों की लंबाई अब दिनों-दिन बढ़ रही है। उनके पौधों की लंबाई छह इंच से बढ़कर पांच फीट हो गई है।

 

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